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सोमवार, 21 जून, 2004 को 06:11 GMT तक के समाचार
 
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बेस्ट बेकरी मामला: सुनवाई फिर टली
 
बेस्ट बेकरी
बेकरी में 14 लोग ज़िंदा जला दिए गए थे
बेस्ट बेकरी अग्निकांड मामले की सुनवाई के लिए सरकारी वकील की नियुक्ति को लेकर महाराष्ट्र और गुजरात के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है.

इस विवाद की वजह से ही इस मामले की सुनवाई फिर से स्थगित कर दी गई है.

गुजरात में मार्च 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान हुए इस कांड की सुनवाई में दोनों ही राज्य अपना सरकारी वकील नियुक्त करना चाहते हैं जिस वजह से अदालत ने पाँच जुलाई तक मसला हल कर लेने का समय दिया है.

अदालत ने कहा है कि तब तक बात नहीं सुलझने पर मामला उच्चतम न्यायालय के सुपुर्द कर दिया जाएगा.

न्यायमूर्ति एएम थिप्से ने कहा कि अगर मामला उच्चतम न्यायालय तक जाता है तो सुनवाई 19 जुलाई तक स्थगित रहेगी मगर यदि सब कुछ सुलझ गया तो सुनवाई पाँच जुलाई से हर रोज़ होगी.

इससे पहले 10 जून को महाराष्ट्र और गुजरात दोनों ने ही अपना सरकारी वकील नियुक्त करने की बात कही थी जिस पर उन्हें ये मसला सोमवार 21 जून तक सुलझा लेने का निर्देश दिया गया था.

जब सुनवाई शुरू हुई तो अतुल मेहता और टीएस नानावटी गुजरात सरकार की ओर से पेश हुए और बताया कि उन्हें राज्य सरकार ने नियुक्त किया है.

जबकि महाराष्ट्र सरकार के वकील ने सूचित किया कि राज्य ने इसके लिए 18 जून को एक अधिसूचना के ज़रिए पीआर वकील, मंजुला राव, ज़हीरुद्दीन शेख़ और एसएम वोरा की एक टीम नियुक्त की है.

महाराष्ट्र में सुनवाई

बेस्ट बेकरी अग्निकांड की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर गुजरात के बजाय महाराष्ट्र में नए सिरे से हो रही है.

ज़ाहिरा के बयान पर मामला फिर से खुला

लंबी बहस के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने 12 अप्रैल को आदेश दिया था कि बेस्ट बेकरी मामले की सुनवाई गुजरात के बजाय महाराष्ट्र में कराई जाए जिसके तहत मुंबई की एक सत्र अदालत में सुनवाई शुरू हो रही है.

इस सुनवाई के लिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अभय थिप्से की एक विशेष अदालत बनाई गई है.

सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले महीने गुजरात सरकार की अपील ख़ारिज कर दी थी जिसमें बेस्ट बेकरी मामले की सुनवाई गुजरात से बाहर कराने के सुप्रीम कोर्ट के ही एक फ़ैसले पर फिर से विचार करने का अनुरोध किया गया था.

लंबा विवाद

मार्च 2002 में हुए दंगों के दौरान बेस्ट बेकरी हत्याकांड में 14 लोगों को ज़िंदा जला दिया गया था.

पिछले साल मई में एक अदालत ने सभी गवाहों के अपने बयानों से पलट जाने के बाद इस मामले के सभी 21 अभियुक्तों को बरी कर दिया था.

इस मामले की प्रमुख गवाह ज़ाहिरा शेख़ सहित अनेक गवाहों ने अदालत में अपने बयान बदल दिए थे और कहा था कि वे उन अभियुक्तों को नहीं पहचानते.

इस मामले में सभी 21 अभियुक्तों को बरी किए जाने के ख़िलाफ़ अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की नए सिरे से जाँच और महाराष्ट्र में सुनवाई कराने का आदेश दिया था.

अभियुक्तों को बरी किए जाने के बाद ज़ाहिरा शेख़ ने बयान दिया था कि उन्हें और अन्य अभियुक्तों को जान से मारने की धमकियाँ दी गईं जिसकी वजह से उन्होंने अदालत में अपने बयान बदले थे.

तब भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और एक ग़ैरसरकारी संगठन यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में ले गए थे.

सुप्रीम कोर्ट के इस मामले में नए सिरे से सुनवाई कराने के आदेश के बाद तीन अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

 
 
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