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गुरुवार, 13 मई, 2004 को 08:32 GMT तक के समाचार
 
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उत्तर भारत में भी निराशा हाथ लगी
 

 
 
एनडीए का फ़ील गुड का गुब्बारा फूटा
चौदहवीं लोकसभा के नतीजे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की सरकार के लिए तगड़ा झटका साबित हुए हैं.

उन राज्यों में जहाँ भारतीय जनता पार्टी की अगुआई वाले एनडीए को बढ़त की संभावना दिख रही थी, उनमें से भी ज़्यादातर राज्यों में उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा है.

दक्षिण के राज्यों तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में तो पहले ही गठबंधन के हार की भविष्यवाणी की जा रही थी, उत्तर भारत के राज्यों में हार के आंकड़ों ने उसे पूरी तरह से पस्त कर दिया है.

सबसे ज़्यादा 80 सीटों वाले महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में भी पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद से उल्टा रहा है.

बिहार में भी राष्ट्रीय जनता दल, लोक जनशक्ति और काँग्रेस का गठबंधन एनडीए पर भारी पड़ा है.

और तो और नरेंद्र मोदी का गुजरात भी एनडीए को नकार रहा है और यहाँ काँग्रेस को उम्मीद से ज़्यादा सीटें मिलीं हैं.

कुल मिलाकर एनडीए के लिए मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ शुभ साबित हुए हैं. आइए नज़र डालें उत्तर भारत के कुछ राज्यों की स्थिति पर.

उत्तर प्रदेश

भारतीय राजनीति में अहम स्थान रखने वाले उत्तर प्रदेश में सारे आकलन झूठे साबित हुए हैं.

कल्याण फ़ैक्टर फुस्स

लगभग सारे सर्वेक्षणों में भारतीय जनता पार्टी को सबसे ज़्यादा सीटें दिखाई जा रही थीं और समाजवादी पार्टी को घाटा दिखाया जा रहा था.

राज्य में मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी और मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने अच्छी सफलता हासिल की है.

उत्तर प्रदेश में ही भाजपा का आँकड़ा सिर्फ़ 10 सीटों तक सिमट कर रह गया है.

समाजवादी पार्टी एक बार फिर सबसे आगे हैं और केंद्र की आने वाली सरकार में उसका दख़ल होगा.

बिहार और झारखंड

बिहार में लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल, काँग्रेस और रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति का गठबंधन जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन पर भारी पड़ा है.

लालू और पासवान की जोड़ी रंग लाई

भाजपा और जनता दल (यू) गठबंधन को यहाँ बड़ा नुक़सान हुआ है और एनडीए गठबंधन यहाँ सारे सर्वेक्षणों को झुठला रहा है.

आँकड़ों के अनुसार बिहार में लालू के नेतृत्व वाला गठबंधन 26 सीटों पर विजयी हुआ है जबकि भाजपा गठबंधन को 11 सीटों पर ही जीत मिली है.

झारखंड में भी काँग्रेस का गठबंधन काम कर रहा है. यहाँ काँग्रेस ने झारखंड मुक्ति मोर्चा से गठबंधन किया है और गठबंधन ने भाजपा का सफ़ाया कर दिया है.

काँग्रेस गठबंधन यहाँ की 14 सीटों में से 12 सीटों पर जीता है. भाजपा को सिर्फ़ एक सीट पर जीत मिली है.

मध्य प्रदेश और राजस्थान

मध्य प्रदेश में हाल ही में विधानसभा चुनाव जीतकर सरकार चला रही भाजपा के लिए अभी लहर क़ायम है.

उमा भारती का प्रभाव अभी क़ायम है

यहाँ की 29 सीटों में से भाजपा ने 25 पर जीत हासिल की है. काँग्रेस सिर्फ़ चार सीटों पर ही जीत पाई है.

राजस्थान के साथ भी लगभग यही कहानी है. यहाँ भी भाजपा का 'हनीमून पीरियड' अभी चल रहा है.

यहाँ की 25 सीटों में से 21 पर भाजपा जीती है जबकि काँग्रेस के खाते में सिर्फ़ चार सीटें आईं हैं.

 
 
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