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गुरुवार, 29 अप्रैल, 2004 को 15:40 GMT तक के समाचार
 
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'मोदी को बचाकर मुसलमानों के वोट?'
 

 
 
जावेद अख़्तर
जावेद अख़्तर का मानना है कि वह दलीय राजनीति में उतरने में दिलचस्पी नहीं रखते
सुपरिचित गीतकार और पटकथा लेखक, जावेद अख़्तर मानते हैं कि भाजपा की सरकार एक ओर नरेंद्र मोदी का बचाव करती है और दूसरी ओर मुसलमानों के वोट मिलने की ख़्वाहिश रखती है. उनका कहना है कि यह ग़लतफ़हमी में रहने जैसा ही है.

जावेद अख़्तर राजनीति में भी रुचि रखते हैं लेकिन बीबीसी हिंदी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि दलीय राजनीति में आने की उनकी कोई योजना नहीं है.

जावेद के मुताबिक यह ज़्यादा ज़रूरी है कि जो भी सरकार आए, वो ईमानदार हो, देश की उन्नति करने वाली हो और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों में विश्वास रखती हो.

मोदी और मुसलमान

उन्होंने कहा कि एक तरफ़ नरेंद्र मोदी का बचाव करना और दूसरी तरफ़ यह सोचना कि मुसलमान उनका साथ देंगे, यह एक तर्कहीन बात है.

उनका कहना है कि जो मुसलमान ऐसा समर्थन की बात कह रहे हैं, वो ऊपरी तौर पर ही ऐसा कह रहे हैं.

जब उनसे पूछा गया कि इस चुनाव को लेकर उनका क्या अनुमान है, जावेद ने कहा, "आख़िरी तस्वीर क्या होगी, इसको मीडिया, प्रेस और चैनलों के तमाम बड़े-बड़े पंडित भी टटोल ही रहे हैं, इसलिए इस बारे में ज़्यादा कुछ कहना अभी संभव नहीं है."

सितारों की राजनीति

राजनीतिक दलों में बड़े पैमाने पर फ़िल्मी सितारों, क्रिकेट खिलाड़ियों और मीडियाकर्मियों के जुड़ने के बारे में पूछे जाने पर जावेद ने कहा कि वैसे तो कोई भी नागरिक, चाहे वो किसी भी तरह के काम से जुड़ा हुआ हो, उसे प्रचार आदि से जुड़ने का पूरा अधिकार है.

 राजनीति में उन्हीं लोगों को जाना चाहिए जिनकी इस बारे में समझ है, इंडस्ट्री में ऐसे लोग बड़ी तादाद में हैं जिनकी राजनीतिक समझ अच्छी है और जिनका इस क्षेत्र में अनुभव भी है
 
जावेद अख़्तर

लेकिन जावेद का मानना है, "राजनीति में उन्हीं लोगों को जाना चाहिए जिनकी इस बारे में समझ है, इंडस्ट्री में ऐसे लोग बड़ी तादाद में हैं जिनकी राजनीतिक समझ अच्छी है और जिनका इस क्षेत्र में अनुभव भी है."

"बाक़ी कई लोग ऐसे भी हैं जो आ नहीं रहे हैं, लाए जा रहे हैं, उनको बुलाया जा रहा है. इससे यह भी पता चलता है कि अब राजनीतिक दलों के पास कुछ नहीं बचा है इसलिए वो सितारों को लेकर सामने आ रहे हैं."

उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा का उदाहरण देकर बताया कि सिन्हा छात्र जीवन से ही राजनीति में रुचि रखते हैं और बहुत वर्षों से राजनीतिक रूप से सक्रिय भी हैं.

शबाना आज़मी के राजनीति में आने के बारे में जावेद ने बताया कि शबाना राज्यसभा में राजनीतिक रूप से नहीं गई थीं, राष्ट्रपति ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था.

जावेद का मानना है कि दलगत राजनीति से बाहर के कुछ लोगों को राज्यसभा में भेजना अच्छी परंपरा है.

हालांकि, जावेद के मुताबिक इस बार सरकार ने राज्यसभा में मनोनयन के लिए अपने ही लोगों की सूची राष्ट्रपति को सौंपी थी.

राजनीति में रुचि

जावेद से जब पूछा गया कि क्या वो आने वाले समय में राजनीति में आ सकते हैं, उन्होंने बताया कि छात्र जीवन से ही उन्हें राजनीति में दिलचस्पी थी और अब भी है लेकिन वो किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ने के बजाय एक आज़ाद नागरिक के रूप में ही अपने को देखते हैं.

जावेद के मुताबिक "राजनीति कोई विकल्प या रुचि वाली बात नहीं है, हर नागरिक, जो देश के बारे में सोचेगा, वो राजनीति के बारे में भी सोचेगा."

उन्होंने कहा कि "किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ने के बाद वही कहना पड़ेगा, जो पार्टी कहेगी, इसके अलावा अपनी पार्टी की ग़लतियों पर पर्दा डालना होगा और दूसरे की आलोचना भी करनी पड़ेगी, जो कि मुझे कतई पसंद नहीं है."

जावेद के मुताबिक चुनाव की प्रक्रिया में सभी लोगों की रुचि होती है और लोग इस बारे में सोचते हैं कि देश में क्या हो रहा है और क्या होना चाहिए.

 
 
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