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सोमवार, 12 अप्रैल, 2004 को 14:49 GMT तक के समाचार
 
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काँटी थर्मल पॉवर प्लांट का काँटा
 

 
 
काँटी थर्मल पॉवर प्लांट
काँटी थर्मल पॉवर प्लांट इन दिनों बंद पड़ा हुआ है
मुज़फ्फ़रपुर के सांसद के रुप में जॉर्ज फ़र्नांडिस की उपलब्धि याद करनी हो तो लोग काँटी थर्मल पॉवर स्टेशन को याद करते हैं.

बिजली का संकट झेल रहे बिहार के लिए यह बिजली घर वरदान ही हो सकता था लेकिन अब यह बिजली घर बंद पड़ा है और अब काँटी का बिजली घर एक समस्या बनकर रह गया है.

पुरानी तकनीक के इस संयंत्र को चलाने में जो समस्याएँ थीं उसके कारण यह बंद पड़ा है.

दूसरी ओर जले हुए कोयले से निकली हुई राख ने जो समस्याएँ पैदा की हैं वो अलग.

नदी ग़ायब

काँटी थर्मल पॉवर स्टेशन मुज़फ़्फ़रपुर शहर से बाहर स्थित है. इस स्टेशन के बगल से गुज़रने वाली एक सड़क के पार एक गाँव है कठिया.

कठिया गाँव में कोयले की राख
कभी यहीं पर एक कलकल बहती नदी हुआ करती थी

इस गाँव के सामने से कभी एक नदी गुज़रती थी. उस नदी का नाम भी था कठिया.

अब उस गाँव में कोई नदी नहीं है सिर्फ़ कोयले की राख का ढेर है और ढेर सारी बीमारियाँ हैं.

संयंत्र से उड़ने वाली कोयले की राख और संयंत्र से लाकर ढेर किए गए काली राख में यह नदी डूब गई.

सैकड़ों मछुआरे बेरोज़गार हो गए. पानी मिलना बंद हो गया.

एक पुराना मछुआरा केशव कहता है, ‘कहाँ है नदी, पहले हुआ करती थी. उसमें नावें होती थीँ और मछलियाँ भी लेकिन अब कुछ नहीं रहा .’

बीमारियाँ

जब भी हवा बहती है तो उसके साथ काली धूल उड़ती है और वो कठिया गाँव के लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई है.

 काँटी प्लांट से न केवल पानी प्रदूषित हुआ है बल्कि लोगों को साँसों से जुड़ी कई बीमारियाँ हुई हैं
 
सुकांत, संपादक, दैनिक हिंदुस्तान

दैनिक हिंदुस्तान, मुज़फ़्फ़रपुर के संपादक सुकांत का कहना है कि काँटी प्लांट से न केवल पानी प्रदूषित हुआ है बल्कि लोगों को साँसों से जुड़ी कई बीमारियाँ हुई हैं.

इसी अख़बार के स्वास्थ्य संवाददादाता नरेंद्र नाथ का कहना है कि फेफड़े के कैंसर और टीबी जैसी बीमारियों से कई लोगों की मौत हो चुकी है.

गाँव के लोग इसकी पुष्टि करते हैं. विष्णु साहनी कहते हैं, ‘नदी तालाब में तो छाई (राख) गिराकर पाट दिया अब हवा बहती है तो घर भर में राख भर जाती है.’

हैदरा ख़ातून कठिया में बीस साल से रहती हैं. वे कहती हैं, छाई उड़ने से परेशानी तो है ही ऊपर से प्लांट भी बंद है.

उनका कहना है कि वे चाहेंगी कि थर्मल प्लांट पहले चालू करवा दिया जाए जिससे बिजली मिले और गाँव के लोगों को काम मिले.

यह भी दिलचस्प

एक ग्रामवासी
विष्णु का कहना है कि हवा बहती है तो पूरा घर कोयले की राख से भर जाता है

काँटी थर्मल पॉवर प्लाँट का श्रेय है जॉर्ज फ़र्नांडिस को और इसके बंद होने की नाराज़गी भी कुछ हद तक उन्हीं से दिखती है लेकिन यह बिजली घर उनके अपने लोकसभा क्षेत्र में स्थित नहीं है.

उसका ताप झेलना है वैशाली लोकसभा क्षेत्र के सांसद रघुवंश प्रसाद सिंह को.

बीबीसी हिंदी से हुई बातचीत में रघुवंश प्रसाद ने कहा कि उन्होंने प्रयास करके काँटी थर्मल पॉवर स्टेशन को 2000 मेगावाट करने का प्रस्ताव करवा दिया है लेकिन केंद्र इसे मंज़ूर कर ही नहीं रहा है.

हालांकि काँटी के बगल में एक आमसभा को संबोधित करते हुए वे काँटी का नाम एक भी बार नहीं लेते.

 
 
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