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गुरुवार, 08 अप्रैल, 2004 को 23:30 GMT तक के समाचार
 
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विरोध प्रदर्शनों में सैकड़ों गिरफ़्तार
 
नेपाल में गिरफ़्तारी
नेपाल में सैकड़ों लोगों को गिरफ़्तार किया गया है
नेपाल में राजनीतिक रैलियों पर लगे प्रतिबंध का उल्लंघन करने के कारण सैकड़ों लोगों गिरफ़्तार कर लिया गया है.

पुलिस और विपक्ष के अनुसार प्रमुख विपक्षी नेताओं समेत क़रीब 1000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है.

ये प्रदर्शनकारी नेपाल में लोकतंत्र की बहाली की माँग के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. नेपाल की पाँच प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने ये रैली नेपाल नरेश के प्रति विरोध जताने के लिए बुलाई थी.

हालाँकि नेपाल सरकार ने राजधानी काठमांडू और उसके निकट के ललितपुर शहर में राजनीतिक रैलियों पर अनिश्चितकाल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था. लेकिन राजनीतिक पार्टियों ने उसे तोड़ने की क़सम खाई थी.

काठमांडू में बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हेवीलैंड का कहना है कि चारों तरफ अफ़रा-तफ़री का माहौल था. प्रदर्शनकारियों को घसीटकर ट्रकों में भरा जा रहा था.

गिरफ़्तार किए गए लोगों में पूर्व उप-प्रधानमंत्री शैलजा आचार्य और कम्युनिस्ट पार्टी के नेता माधव कुमार नेपाल भी शामिल हैं.

लेकिन नेपाली कांग्रेस के नेता गिरिजा प्रसाद कोइराला को उनके समर्थकों ने गिरफ़्तारी से बचा लिया.

रैली

पुलिस की कोशिश थी कि प्रदर्शनकारियों को नेपाल नरेश के महल के पास रत्ना पार्क में इकट्ठा नहीं होने दिया जाए. यहाँ एक सप्ताह से ज़्यादा समय से इनकी रैली चल रही थी.

बताया जा रहा है कि दो हफ्तों के पोखरा और आसपास के ज़िलों के दौरे के बाद राजा ज्ञानेंद्र शुक्रवार को ही काठमांडू वापस लौट रहे हैं.

 हम सब ने सरकार के प्रतिबंध के ख़िलाफ जाने का फैसला किया है.
 
माधव कुमार नेपाल

गुरूवार को लगाये गये प्रतिबंध का मतलब ये है कि सार्वजनिक स्थलों पर पाँच से अधिक लोग एक साथ नहीं जुट सकेंगे.

सरकारी अधिकारियों के अनुसार उन्हें रैलियों पर प्रतिबंध इसलिए लगाना पड़ा क्योंकि उनके पास ऐसी जानकारी आई थी कि माओवादी विद्रोही इन रैलियों में घुसपैठ कर हिंसा भड़काना चाहते थे.

पिछले साल सितंबर में भी इसी तरह का प्रतिबंध लगाया गया था. लेकिन विपक्षी नेताओं ने इस प्रतिबंध को मानने से इनकार कर दिया.

विपक्षी नेता माधव कुमार नेपाल ने एएफपी न्यूज़ एजेंसी को बताया, " हम सब ने सरकार के प्रतिबंध के ख़िलाफ जाने का फैसला किया है. हम सभी इसका विरोध करेंगे."

नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने अक्तूबर 2002 में नेपाल में सारे अधिकार अपने हाथ में ले लिए थे और विपक्षी पार्टियां तभी से नेपाल नरेश का विरोध कर रही हैं.

सभी पार्टियाँ संसद की बहाली की मांग कर रही हैं. उनका मानना है कि इससे आठ साल से चल रहे माओवादी आंदोलन के ख़त्म होने के रास्ते भी खुलेंगे, जिसमें अब तक 9000 लोग मारे जा चुके हैं.

 
 
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