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मंगलवार, 30 मार्च, 2004 को 11:34 GMT तक के समाचार
 
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भाजपा का चुनावी दस्तावेज़ जारी
 
वेंकैया नायडू और जसवंत सिंह
भाजपा के दृष्टिपत्र में कश्मीर जैसे विवादास्पद मुद्दों को छोड़ दिया गया
भारतीय जनता पार्टी ने अपना चुनावी दस्तावेज़ जारी कर दिया है जिसे दृष्टिपत्र 2004 कहा जा रहा है.

इस दस्तावेज़ में भाजपा ने कहा है कि वह हिंदुत्व और राम मंदिर के मामले पर अब भी प्रतिबद्ध है लेकिन इसे जारी करते हुए पार्टी के अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने स्पष्ट किया कि वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीएके एजेंडा पर क़ायम हैं.

उन्होंने कहा कि सरकार चलाने के मामले में एनडीए का चुनावी घोषणापत्र ही दिशा-निर्देश का काम करेगा.

नायडू ने कहा, "भाजपा बाक़ी पार्टियों से अलग है, आने वाले वर्षों के लिए उसकी कुछ प्राथमिकताएँ और प्रतिबद्धताएँ हैं."

दिलचस्प बात ये भी है कि इस दस्तावेज़ में भाजपा ने कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने यानी अनुच्छेद 370 को हटाने के मुद्दे का उल्लेख नहीं किया है.

विदेशी मूल

कुल 48 पन्नों के इस दस्तावेज़ में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि विदेशी मूल के लोगों को उच्च पदों पर आने से रोकने के लिए क़ानून बनाया जाना चाहिए.

 भाजपा बाक़ी पार्टियों से अलग है, आने वाले वर्षों के लिए उसकी कुछ प्राथमिकताएँ और प्रतिबद्धताएँ हैं
 
भाजपा अध्यक्ष वेंकैया नायडू

दृष्टिपत्र में कहा गया है कि अयोध्या का रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद बाचतीच के ज़रिए हल होना चाहिए और हिंदू-मुस्लिम रिश्तों में एक नए युग की शुरूआत होनी चाहिए.

इसमें कहा गया है कि दोनों समुदायों के नेताओं को बातचीत की प्रक्रिया तेज़ करनी चाहिए.

जानकारों का कहना है कि इस दस्तावेज़ में भाजपा ने संघ के नेताओं और कार्यकर्ताओं को ख़ुश रखने की कोशिश की है और उनके मुद्दों को इसमें पूरी जगह दी है.

इस दस्तावेज़ में प्रधानमंत्री वाजपेयी की लोकप्रिय छवि का भरपूर लाभ उठाने की कोशिश की गई है, इसके हर पन्ने पर वाजपेयी की तस्वीर है और कहा गया है कि वे भारत को एक विकसित देश बनाना चाहते हैं.

भाजपा ने मुस्लिम मतदाताओं का भी ध्यान रखा है, दृष्टिपत्र में अल्पसंख्यकों के लिए शिक्षा, आर्थिक विकास और सशक्तिकरण का वादा किया गया है.

इसके अलावा, मुस्लिम मतदाताओं से अपील की गई है कि वे भाजपा के प्रति अपनी विचारधारा बदलें और आने वाले चुनाव में वाजपेयी के हाथ मज़बूत करें.

मुसलमानों से जुड़े एक अन्य प्रमुख मुद्दे--समान नागरिक क़ानून--के बारे में दृष्टिपत्र में कहा गया है कि इसे लागू करने से पहले देश में आम राय का होना बहुत ज़रूरी है.

 
 
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