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शुक्रवार, 27 फ़रवरी, 2004 को 18:28 GMT तक के समाचार
 
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बिहार से क्यों होता है पलायन?
 

 
 
सिवान में बीबीसी हिंदी के कारवाँ में भारी भीड़ जुटी
सिवान में बीबीसी हिंदी के कारवाँ में भारी भीड़ जुटी
इमामुद्दीन सिद्दीक़ी के चार बेटे सिवान से खाड़ी के देशों में गए और अब वहीं काम करते हैं.

वे कहते हैं, "हम जहाँ भी हो, बिहार से बाहर हो, हिंदुस्तान से बाहर हो, हमारे जवान जाते हैं, इल्म सीखते हैं, दौलत कमाते हैं."

केरल के बाद बिहार का सिवान ही वह इलाक़ा है जहाँ से सबसे ज़्यादा लोग काम की तलाश में खाड़ी के देशों में गए और उनकी कमाई की एक झलक यहाँ देखी भी जा सकती है.

लेकिन सवाल ये है कि ये लोग शौक से बाहर जा रहे हैं या मजबूरी में?

 जो बिहार कभी अपनी शिक्षा के लिए विक्रमशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों के लिए इठलाया करता था वो एक केंद्रीय विश्वविद्यालय पाने के लिए तरस रहा है
 
अभिषेक राज, छात्र

"बिहार से लोगों का पलायन क्यों?" - यही था विषय बीबीसी हिंदी की ओर से सिवान में आयोजित की गई परिचर्चा का.

वीएम मिडिल स्कूल परिसर में आयोजित परिचर्चा के अवसर पर कम-से-कम दो हज़ार लोग जुटे.

मंच पर इमामुद्दीन सिद्दीक़ी के अलावा सउदी अरब में काम करने वाले ईद मोहम्मद अंसारी, रोज़गार की तलाश में जुटे युवक रितेश कुमार और उच्च शिक्षा प्राप्त छात्रा कुमारी आराधना को बुलाया गया था.

पहले तो श्रोताओं ने मंच पर रेणु अगाल और मणिकांत ठाकुर का स्वागत किया उसके बाद परिचर्चा शुरू हुई.

श्रोताओं ने परिचर्ची में अपने विचार रखे

ईद मोहम्मद अंसारी ने सबसे पहले सिद्दीक़ी साहब की राय से असहमति जताई, "सिद्दीक़ी साहब ने कहा कि जो बहादुर हैं वही विदेश में काम करते हैं तो क्या इसका मतलब ये है कि जो यहाँ रह रहे हैं वे बहादुर नहीं हैं?"

जल्दी ही बहस का रूख़ यहाँ शिक्षा की ख़राब हालत और यहाँ उद्योग-धंधों तथा रोज़गार की स्थिति की ओर मुड़ गया.

दिल्ली में सिविल सेवा की तैयारी करने वाले अभिषेक राज ने कहा, "मैं कहना चाहता हूँ कि यहाँ शिक्षा की स्तर बिल्कुल गिर चुका है. जो बिहार कभी अपनी शिक्षा के लिए विक्रमशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों के लिए इठलाया करता था वो एक केंद्रीय विश्वविद्यालय पाने के लिए तरस रहा है."

मगर कुछ लोग ऐसे भी थे जो तमाम मुश्किलों और अवसरों की कमी के बावजूद अपनी धरती से पलायन करने के हिमायती नहीं थे.

हंसा कुमारी ने कहा, "मैं मानती हूँ कि बिहार में शिक्षा की स्थिति ख़राब है, मगर आपके घर की हालत ख़राब हो जाएगी तो क्या आप अपने घर को छोड़ देंगे. आप उसे अपने सपनों का घर बनाने की कोशिश करिएगा."

सिवान स्वतंत्रता सेनानी मज़हरूल हक़ की भूमि होने के साथ-साथ भोजपुरी भाषा और संस्कृति का केंद्र रहा है.

 इंजीनियर सत्येंद्र दुबे ईमानदार थे इसलिए उनकी कार्यशैली से क्षुब्ध होकर उनकी हत्या कर दी गई. बड़े-बड़े जो पदाधिकारी हैं वे यहाँ आना नहीं चाहते हैं. यहाँ फ़िरौती के लिए अपहरण हो रहे हैं तो फिर कोई यहाँ क्यों आना चाहेगा
 
रितेश कुमार

इतिहास चाहे जो भी रहा हो आज सिवान सांसद शहाबुद्दीन के कारण राजनीतिक विवादों और अपराध के कारण चर्चा में रहता है.

रितेश कुमार का मानना था कि बढ़ता अपराध भी पलायन का एक प्रमुख कारण है.

रितेश ने कहा, "इंजीनियर सत्येंद्र दुबे ईमानदार थे इसलिए उनकी कार्यशैली से क्षुब्ध होकर उनकी हत्या कर दी गई. बड़े-बड़े जो पदाधिकारी हैं वे यहाँ आना नहीं चाहते हैं.यहाँ फ़िरौती के लिए अपहरण हो रहे हैं तो फिर कोई यहाँ क्यों आना चाहेगा?"

कुछ वक्ताओं ने ये भी सवाल उठाया कि तरक्की के लिए दूसरे राज्यों या विदेश जाने में बुराई क्या है.

तो कुछ लोगों ने प्रतिभा पलायन के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए सामाजिक जीवन में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.

 
 
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