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रविवार, 08 फ़रवरी, 2004 को 20:52 GMT तक के समाचार
 
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युवा वर्ग के सामने सबसे बड़ी समस्या क्या है?
 

 
 
बीबीसी हिंदी सेवा के श्रोता आज के ज्वलंत विषयों पर बहस कर रहे हैं
'रोक सकता हमें ज़िन्दान भला क्या मजरूह,

हम तो आवाज़ हैं दीवारों से छन जाते हैं'.

सुल्तानपुर पहुँची तो मजरूह सुल्तानपुरी की याद आना स्वभाविक था. ये उनका बहुत मशहूर शेर है.

मजरूह ने कहा हमें क़ैदख़ाने की दीवारें भी नहीं रोक सकतीं.

हमने जानने की कोशिश की कि क्या ये दावा सुल्तानपुर के आज के युवा वर्ग पर भी सही बैठता है?

सुल्तानपुर ज़िला, जो कि 1977 से ही उत्तर प्रदेश में काँग्रेसी राजनीति का केंद्र रहा है. अमेठी चुनाव क्षेत्र इसी ज़िले का हिस्सा है.

जेएनआईसी स्कूल के अहाते में सैंकड़ो युवा श्रोता उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे थे.

आपकी बात बीबीसी के साथ के सुल्तानपुर विचारमंच का विषय था: युवा भारत- सबसे बड़ा मुद्दा क्या?

पैनल में शामिल थे- मुख्य विकास मंत्री लक्ष्मीकांत शुक्ल, वकील राजकुमार श्रीवास्तव, छात्र नेता जगदंबा प्रसाद और बेरोज़गार युवक मंगल सिंह.

संचालन किया बीबीसी के उत्तर प्रदेश संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी ने.

ज़ाहिर है बेरोज़गारी सबसे प्रमुख समस्या के रूप में सामने आई.

मंगल सिंह ने कहा कि सुल्तानपुर के गांवों में पिछड़ापन है और युवाओं में जागरुकता का अभाव है.

उन्हें स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाया.

मणिराम यादव ने कहा कि बेरोज़गारी दूर नहीं हुई तो युवा असामाजिक गतिविधियों में फँसते रहेंगे.

बेरोज़गारी पर बहस चलती रही लेकिन और सवाल भी उठे- स्वरोज़गार के क्या रास्ते हैं?युवा वर्ग खेती से क्यों घबराता है? तकनीकी शिक्षा देने वाले संस्थानों की कमी की भूमिका?

रिश्वत की समस्या

पेशे से शिक्षक मोहम्मद इरफ़ान ने घूस की समस्या को सबसे बड़ी समस्या बताया. उन्होंने कहा कि रिश्वत के दौर में क़ाबिल लोगों को भी उचित जगह नहीं मिल पाती है.

वकील पीयूष मिश्र ने आरोप लगाया कि ज़िला उद्योग कार्यालय हो या बैंक, स्वरोज़गार के इच्छुक लोगों से कर्ज़ का एक हिस्सा रिश्वत के रूप में माँगा जाता है.

दोहरी शिक्षा प्रणाली, जनसंख्या विस्फोट, युवाओं में नैतिकता का पतन और निर्देश देने वालों का अभाव जैसे मुद्दों को छूती हुई बहस ईमानदार नेतृत्व के संकट के विषय पर आ पहुँची.

राजेश कुमार और राजेश तिवारी जैसे कई वक्ताओं ने नवयुवकों के समक्ष आदर्श या मॉडल की कमी और अच्छे परामर्शदाता के अभाव की बात उठाई.

सोमवार को बीबीसी हिंदी सेवा का कारवाँ प्रतापगढ़ पहुँच रहा है. वहाँ गवर्नमेंट इंटर कॉलेज में दो बजे श्रोता अपनी बात बीबीसी के सामने रखेंगे.

 
 
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