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बुधवार, 04 फ़रवरी, 2004 को 11:40 GMT तक के समाचार
 
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राजीव गाँधी बोफ़ोर्स मामले में दोषमुक्त
 
हिंदुजा बंधु
हिंदुजा बंधुओं को कोई राहत नहीं मिली
बोफ़ोर्स तोप सौदे में दलाली लेने के मुक़दमे से दिल्ली हाइकोर्ट ने राजीव गाँधी का नाम पूरी तरह से हटा दिया है.

आरोप यह थे कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के कार्यकाल में बोफ़ोर्स तोप की ख़रीद के लिए 64 करोड़ रूपए दलाली के तौर पर लिए गए थे जिसमें वे भी हिस्सेदार थे.

अदालत के इस फ़ैसले का राजीव गाँधी के परिवार और कांग्रेस ने स्वागत किया है.

दूसरी ओर, अदालत ने लंदन में रहने वाले व्यापारी हिंदुजा बंधुओं पर लगाए गए धोखाधड़ी और साज़िश रचने के आरोप को क़ायम रखा है.

इसके अलावा अदालत ने स्वीडन की कंपनी एबी बोफ़ोर्स के ख़िलाफ़ भी जाली दस्तावेज़ तैयार करने के आरोपों को भी बहाल रखा है.

अब इस मामले की सुनवाई 23 फ़रवरी को होगी.

हिंदुजा बंधुओं ने दो वर्ष पहले इस पूरे मामले को चुनौती दी थी और कहा था कि इस मामले में उनकी भूमिका को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है.

स्वीडिश कंपनी एबी बोफ़ोर्स ने भी अपने ख़िलाफ़ लगे आरोपों को रद्द कराने की कोशिश की थी लेकिन उसे सफलता नहीं मिली है.

राजीव गाँधी की सरकार ने 1986 में बोफ़ोर्स चार सौ हविट्ज़र तोपों का ऑर्डर दिया था.

जाँच एजेंसी सीबीआई ने दलाली खाने के इस मामले में दो आरोपपत्र दाख़िल किए थे.

पहले आरोपपत्र में तत्कालीन रक्षा सचिव एस के भटनागर, बोफ़ोर्स के एजेंट विन चड्ढा, इतालवी व्यापारी ओत्तावियो क्वात्रोची और बोफ़ोर्स के तत्कालीन प्रमुख मार्टिन आर्दबो शामिल थे.

एक वर्ष बाद दाख़िल किए गए आरोपपत्र में हिंदुजा बंधुओं पर भी आरोप लगाए गए कि उन्होंने 14 करोड़ रूपए की दलाली ली थी.

यहाँ यह स्पष्ट कर देना ज़रूरी है कि राजीव गाँधी का नाम दोनों में से किसी आरोपपत्र में नहीं था और वे इस मामले में अभियुक्त नहीं थे.

उनके नाम को मुकदमे से बाहर निकालने का अदालत का फ़ैसला क़ानूनी दृष्टि से कोई ख़ास महत्वपूर्ण नहीं है लेकिन गाँधी परिवार की प्रतिष्ठा और काँग्रेस की राजनीति पर इसका असर ज़रूर दिखेगा.

स्वागत

राजीव गाँधी की पत्नी और काँग्रेस की वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया है.

सोनिया गाँधी ने पत्रकारों को अपने घर पर आमंत्रित किया और एक संक्षिप्त बयान दिया.

उन्होंने कहा कि यह क्षण उनके लिए और उनके परिवार के लिए महत्वपूर्ण है.

अपने बेटे राहुल और बेटी प्रियंका के साथ पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, ''हम तीनों ने सत्रह वर्ष तक झूठे मुक़दमें को बर्दाश्त किया.''

उल्लेखनीय है कि यह एक बड़ा राजनीतिक मामला रहा है और चुनावी मुद्दा बनता रहा है.

 
 
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