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सोमवार, 13 अक्तूबर, 2003 को 14:55 GMT तक के समाचार
 
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रैलियों पर पाबंदी का आदेश टला
 
कोलकाता में कार जाम
कोलकाता के एक न्यायाधीश यातायात जाम में घंटों फँसे रहे थे

कोलकाता हाईकोर्ट ने अपने ही एक न्यायाधीश के उस आदेश को स्थगित कर दिया है जिसमें राज्य में सप्ताह के कामकाज वाले दिनों में रैलियाँ और जुलूस निकालने पर पाबंदी लगा दी गई थी.

पश्चिम बंगाल सरकार ने सोमवार को न्यायाधीश अमिताभ लाला के इस फ़ैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी.

न्यायाधीश एके गांगुली और एसपी ताल्लुकदार ने सरकार की याचिका पर सुनवाई की. मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी.

सरकार ने इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए इसे एक नैतिक जीत बताया है.

सरकार के एडवोकेट जनरल बालाई रॉय ने दलील दी कि न्यायाधीश अमिताभ लाला के इस फ़ैसले से भारतीय संविधान के कुछ प्रावधानों का उल्लंघन होता है जिसमें लोगों को शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए इकट्ठा होने और जुलूस निकालने का अधिकार है.

इसके बाद न्यायाधीश गांगुली और ताल्लुकदार ने न्यायाधीश अमिताभ लाला के आदेश को स्थगित कर दिया.

साथ ही सरकार से इस मामले में अपनी आपत्तियाँ विस्तार से 12 नवंबर तक दर्ज कराने के लिए भी कहा गया है.

धर्मसंकट

राज्य सरकार न्यायाधीश लाला के आदेश से सरकार बड़ी मुश्किल में फँसती नज़र रही थी.

उसके सामने धर्मसंकट यह था कि वह यह आदेश लागू करती तो अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों के विरोध का सामना करना पड़ता.

अगर नहीं लागू करती तो यह इल्ज़ाम लगता कि अदालत का फ़ैसला लागू नहीं किया जा रहा है.

जानकारों का कहना है कि उच्च न्यायालय के इस फ़ैसले से राज्य सरकार को काफ़ी राहत मिली है.

पाबंदी

ग़ौरतलब है कि कोलकाता हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश अमिताभ लाला ने पिछले महीने ये आदेश जारी किया था कि सप्ताह के कामकाज वाले दिनों में सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक कोलकाता में रैलियाँ और जुलूस नहीं निकाले जाएं.

मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य
मुख्यमंत्री पाबंदी से परेशान थे

राज्य सरकार ने इस फ़ैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए कहा था कि विभिन्न राजनीतिक दल और संगठन अपनी माँगों के समर्थन में कोलकाता में रैलियाँ और जुलूस निकालने के लिए अनुमति माँग रहे हैं.

मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने कहा था कि उनकी सरकार निचली अदालत के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ संघर्ष करेगी.

"हमें सार्वजनिक सभाएं करने, रैलियाँ और जुलूस निकालने के राजनीतिक दलों के अधिकार का ख़याल है और इस मुद्दे पर हम न्यायालय से इंसाफ़ पाने की उम्मीद कर रहे हैं."

लेकिन राज्य के व्यावसायिक समूहों और नागरिक संगठनों ने ये कहते हुए इसका स्वागत किया था कि इससे आम लोगों को रैलियों के कारण होनेवाली परेशानी से छुटकारा मिलेगा.

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने इससे पहले इस विवाद पर खुलकर कुछ नहीं कहा था मगर रविवार को उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस आदेश को अदालत में चुनौती देगी.

इसके पहले पिछले पूरे सप्ताह राज्य में छोटी वामपंथी पार्टियों ने अदालत के आदेश की परवाह न करते हुए रैलियाँ निकाली थीं.

 
 
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