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शुक्रवार, 30 मई, 2008 को 14:27 GMT तक के समाचार
 
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महंगाई के विरोध में यूरोप में प्रदर्शन
 
यूरोप में ईंधन की महंगाई पर विरोध प्रदर्शन
यूरोप के कई देशों में डीज़ल की बढ़ती क़ीमतों के विरोध में प्रदर्शन हुए हैं
अनेक देशों में तेल और गैस की बढ़ती क़ीमतों पर भड़के विरोध प्रदर्शन यूरोप के कई देशों तक फैल गए हैं और हज़ारों मछुआरे भी इन विरोध प्रदर्शनों में शामिल हो गए हैं.

मज़दूर संगठनों ने कहा है कि पुर्तगाल के तटों पर काम करने वाले तमाम लोगों ने शुक्रवार को कोई कामकाज नहीं किया, जबकि स्पेन में क़रीब सात हज़ार मछुआरों ने कृषि मंत्रालय के सामने प्रदर्शन किया.

फ्रांस में मछुआरे कई सप्ताह से प्रदर्शन कर रहे हैं और अब इन विरोध प्रदर्शनों में इटली और बेल्जियम के मछुआरे भी शामिल हो गए हैं.

ब्रिटेन और जर्मनी के ट्रक चालकों ने भी इस सप्ताह इसी तरह के विरोध प्रदर्शन किए थे. स्पेन की राजधानी मैड्रिड में भी हज़ारों मछुआरों ने कृषि मंत्रालय की तरफ़ मार्च किया है और वहाँ उन्होंने क़रीब बीस टन ताज़ा मछलियाँ आम लोगों में बाँटीं ताकि आम लोगों का ध्यान अपनी समस्याओं की तरफ़ खींच सकें.

कुछ प्रदर्शनकारियों ने सीटियाँ और भोंपू भी बजाए और ऐसे पटाख़े भी छोड़े जिनसे लाल धुआँ निकल रहा था.

प्रदर्शन स्थल पर मौजूद बीबीसी संवाददाता स्टीव किंग्सटन का कहना है कि कुछ बैनरों पर लिखा था, "डीज़ल की बढ़ती क़ीमतों और मछलियों कि घटती क़ीमतों का मतलब निकलता है - मछुआरों की बर्बादी."

एक अन्य बैनर पर स्पेन के प्रधानमंत्री होज़े लुई रोड्रिग्ज़ के नाम संदेश लिखा था, "आप हमें क़ब्रिस्तान भेज रहे हैं."

ये सभी प्रदर्शनकारी ईंधन की बढ़ती क़ीमतों पर ग़ुस्से का इज़हार हड़ताल के ज़रिए कर रहे हैं. ध्यान रहे कि तेल की क़ीमतें प्रति बैरल 130 डॉलर पर पहुँच चुकी हैं.

सहायता पैकेज

यूरो में यह क़ीमत क़रीब 83.40 प्रति बैरल और ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग में एक बैरल तेल की क़ीमत 65.80 है.

बढ़ती तेल क़ीमतों के विरोध में प्रदर्शन
तेल की क़ीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं

मज़दूर संगठनों का कहना है कि डीज़ल की क़ीमतों अभूतपूर्व रूप से उछाल आया है.

डीज़ल की क़ीमतें पिछले पाँच साल में पहले ही 300 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं.

उधर मछलियों के थोक कारोबार की क़ीमतों में पिछले क़रीब बीस साल में कोई बदलाव नहीं हुआ है.

फ्रांस, स्पेन और इटली के मछुआरों के नेताओं ने पेरिस में मुलाक़ात करके इस रणनीति पर विचार किया है कि आगामी तीन सप्ताह के दौरान हड़ताल और प्रदर्शन कैसे आगे बढ़ाए जाएँ क्योंकि तीन सप्ताह के भीतर यूरोपीय संघ के मछली पालन मंत्रियों की बैठक होने वाली है.

प्रदर्शनकारियों की माँग है कि मछली पालन उद्योग को तुरंत सीधे तौर पर सहायता मुहैया कराई जाए और फिर सब्सिडी में भी इज़ाफ़ा किया जाए.

यूरोपीय आयोग ने एक वक्तव्य जारी करके कहा है कि वह मछली पालन उद्योग के लिए लचीलापन दिखाने के लिए तैयार है लेकिन उसने कहा है कि ईंधन की बढ़ती क़ीमतों के दबाव में आनन-फानन में कुछ नहीं किया जा सकता है.

फ्रांस में अधिकारियों ने सरायता पैकेज के तौर पर दस करोड़ डॉलर की रक़म देने का वादा किया है और इस भरोसे के बाद बहुत से मछुआरे काम पर लौट आए हैं.

 
 
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