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बुधवार, 05 मार्च, 2008 को 13:50 GMT तक के समाचार
 
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गुलाबी अख़बार का चलन!
 

 
 
क्या कोई टाइम मशीन है दुनिया में?
अनेक वित्तीय अख़बार आज भी गुलाबी क़ाग़ज़ पर ही छपते हैं
आर्थिक समाचार पत्र, गुलाबी काग़ज़ पर ही क्यों छापे जाते हैं. यह सवाल किया है नानपारा उत्तर प्रदेश से शैलेंद्र ने.

इसकी शुरूआत ब्रिटेन के दैनिक समाचार पत्र फ़ाइनैंशियल टाइम्स से हुई. इसकी स्थापना जेम्स शैरिडन और उनके भाई ने 1888 में की थी. सन् 1893 में इसे गुलाबी रंग के काग़ज़ पर छापा जाने लगा जिससे यह प्रतिद्वंद्वी अख़बार फ़ाइनैंशियल न्यूज़ से अलग दिखाई दे सके. लेकिन इसके पीछे एक कारण यह भी था कि गुलाबी क़ाग़ज़ सफ़ेद काग़ज़ से सस्ता पड़ता था. बहरहाल यह तरकीब कारगर सिद्ध हुई और 1945 में ये दोनों अख़बार एक हो गए.

कन्हरिया बाज़ार, पूर्णियां बिहार से दिलीप कुमार सेंचुरी और बिमला रानी सेंचुरी ने पूछा है कि पटना का नाम अज़ीमाबाद किसने रखा था और कब?

पटना बहुत प्राचीन शहर है. इतिहास की दृष्टि से इसकी स्थापना मगध के राजा अजातशत्रु ने 490 ईसा पूर्व की थी. वो राजगृह से अपनी राजधानी ऐसी जगह ले जाना चाहते थे जहाँ से वैशाली के लिच्छवियों से मुक़ाबला करना आसान हो. कहते हैं गौतम बुद्ध यहाँ आए, यहाँ गुप्त साम्राज्य की राजधानी रही, शेरशाह सूरी ने इसे अपना गढ़ बनाया. दो शताब्दी से अधिक के इतिहास में पटना के कई नाम रखे गए, जैसे पाटलीग्राम, पाटलिपुत्र, कुसुमपुर, पुष्पपुर और अज़ीमाबाद. अज़ीमाबाद नाम 1704 में औरंगज़ेब के पोते अज़ीमुश्शाह ने रखा था. उन्होंने कई मोहल्ले बनाए जैसे मुग़लपुर, शाहगंज और दीवान. 1811 में अज़ीमाबाद में एक पूर्वी दरवाज़ा और एक पश्चिमी दरवाज़ा बनाया गया लेकिन 1857 में उन्हें गिरा दिया गया जिससे शहर का विस्तार किया जा सके.

नोकिया कहाँ की कंपनी है, यह पूछा है आशु ने.

नोकिया फ़िनलैंड की एक बहुराष्ट्रीय संचार कंपनी है जो दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल बनाने वाली कंपनी भी है. इस कंपनी का फ़िनलैंड की अर्थव्यवस्था में बड़ा भारी योगदान है. इस कंपनी का मुख्यालय राजधानी हैलसिंकी के पड़ोसी शहर ऐस्पू में है. इसकी स्थापना 1865 में टैम्पेयर शहर में लकड़ी की लुग्दी बनाने वाली मिल की तरह हुई थी लेकिन फिर इसे नोकिया शहर स्थानांतरित कर दिया गया. यह कंपनी मोबाइल तकनोलॉजी 1960 के दशक से तैयार कर रही है. लेकिन इसका पहला मोबाइल फ़ोन 1987 में बाज़ार में आया था.

रोहतक हरियाणा से अशोक कौशिक ने पूछा है कि ग़ज़ल, गीत और नज़्म में क्या फ़र्क है.

ग़ज़ल प्राचीन फ़ारसी की काव्य शैली है जो उर्दू में परवान चढ़ी. ग़ज़ल की हर पंक्ति को मिस्रा कहा जाता है और दो मिस्रों से मिलकर बनता है शेर. हर शेर अपने आप में संपूर्ण होता है. ग़ज़ल की एक विशेषता यह भी है कि हर शेर में बात पूरी हो जानी चाहिए. पहले शेर की दोनों पंक्तियों का अंत मिलता-जुलता होना चाहिए और बाक़ी शेरों की दूसरी पंक्ति उसी से मेल खाती होनी चाहिए. इसे रदीफ़ कहते हैं. जहाँ तक नज़्म का सवाल है वो भी ग़ज़ल की तरह एक छंदबद्ध और लयबद्ध कविता है लेकिन उसमें विचार का एक प्रवाह रहता है. ग़ज़ल की तरह हर शेर अलग-अलग अर्थ का नहीं होता. और नज़्म की तरह गीत हिंदी की एक काव्य शैली है जो छंदबद्ध, लयबद्ध और गेय होती है.

 
 

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