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शुक्रवार, 28 दिसंबर, 2007 को 12:44 GMT तक के समाचार
 
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ब्रितानी प्रेस की सुर्ख़ियाँ
 
अख़बार
लगभग सभी अख़बारों ने बेनज़ीर की हत्या की ख़बर सुर्ख़ियों में छापी
ब्रितानी प्रेस ने बेनज़ीर भुट्टो को प्रिंसेस डायना की तर्ज़ पर पाकिस्तान की पीपल्स प्रिंसेस कह कर श्रद्धांजलि दी है.

टाइम्स ने इस हत्या को एक दुस्वप्न बताया है और कहा है कि उनकी विरासत को आगे बढ़ाना तभी सार्थक माना जाएगा जब पाकिस्तान में जल्द से जल्द लोकतंत्र बहाल किया जाए.

अख़बार ने अपने संपादकीय में लिखा है, "बेनज़ीर की हत्या का उद्देश्य पाकिस्तान की जनता के चुनाव के अधिकार पर प्रहार करना था. अब पाकिस्तान को उनकी स्मृति का सम्मान करते हुए यह दिखा देना चाहिए कि उग्रवाद पर हमेशा लोकतंत्र की जीत होती है".

 बेनज़ीर की हत्या का उद्देश्य पाकिस्तान की जनता के चुनाव के अधिकार को नष्ट करना था. अब पाकिस्तान को दिखा देना चाहिए कि उग्रवाद पर लोकतंत्र की जीत होती है.
 
द टाइम्स

डेली मेल का कहना है, "यदि बेनज़ीर की मौत का कोई मतलब है तो जनरल मुशर्रफ़ को चाहिए कि वह जल्द से जल्द लोकतंत्र बहाली के काम में तेज़ी लाएँ. उन्हें यह स्वीकार करना चाहिए कि दीर्घकालीन स्थिरता के लिए सुधार ही एकमात्र आशा है".

गार्डियन जैसे कुछ अन्य अख़बारों ने इस बात पर ध्यान दिया है कि बेनज़ीर भुट्टो के न रहने का पाकिस्तान को लेकर अमरीका की नीति पर क्या असर पड़ेगा जो अब तक इस बात पर केंद्रित थी कि कैसे मुशर्रफ़ और बेनज़ीर के बीच सत्ता की भागीदारी को आगे बढ़ाया जाए.

 अमरीका की इस योजना को भारी आघात पहुँचा है कि सैन्य राष्ट्रपति से असैनिक नेता बने मुशर्रफ़ की छवि बेहतर बनाने के लिए बेनज़ीर एक कवच की भूमिका निभाएँ.
 
गार्डियन

गार्डियन अपने संपादकीय में लिखता है, "अमरीका की इस योजना को भारी आघात पहुँचा है कि सैन्य राष्ट्रपति से असैनिक नेता बने मुशर्रफ़ की छवि बेहतर बनाने के लिए बेनज़ीर एक कवच की भूमिका निभाएँ.

अब यह आड़ भी नहीं रही है और अमरीका वापस उसी जगह पहुँच गया है कि कैसे एक मित्र का साथ दे जो अपने ही देश में बेहद अलोकप्रिय है".

उधर फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस ने बेनज़ीर भुट्टो की मौत को एक ऐसे देश के लिए भारी आघात बताया है जो पहले ही अपनी ख़ामियों का नतीजा भुगत रहा है.

समाचार पत्र लिखता है, "इस समय पाकिस्तान के सभी नेताओं को एकजुट हो कर चरमपंथ को हराना चाहिए और अपने शासकों की साख और विश्वसनीयता बहाल करने में मदद करनी चाहिए".

 
 
भारतीय अख़बार 'एक उम्मीद का अंत'
भारतीय अख़बारों ने बेनज़ीर की हत्या के बाद पाकिस्तान के भविष्य पर चिंता जताई.
 
 
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