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मंगलवार, 01 मई, 2007 को 00:42 GMT तक के समाचार
 
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'कनिष्क में धमाके की चेतावनी मिली थी'
 
विमान हादसा
विस्फोट में सभी 329 यात्री मारे गए थे
कनिष्क विमान विस्फोट की दोबारा हो रही जाँच में सुनवाई के दौरान कनाडा के एक अधिकारी ने दावा किया है कि हमले की चेतावनी पहले दे दी गई थी लेकिन अधिकारियों ने उस पर ध्यान नहीं दिया.

जून 1985 में कनाडा से भारत आ रहे एयर इंडिया के कनिष्क विमान में बम विस्फोट हुआ था जिसमें 329 लोग मारे गए थे और उनमें से अधिकतर भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक थे.

इस मामले की सुनवाई के दौरान कनाडा के पूर्व अधिकारी ने ऐसा दावा किया है.

कनाडा के अधिकारी इस बात से इनकार करते रहे हैं कि उन्हें पहले से हमले की कोई जानकारी थी.

ये जाँच पिछले साल के अंत में शुरू की गई जब बम हमले का शिकार हुए एयर इंडिया विमान में मारे गए यात्रियों के परिजनों ने लंबा अभियान चलाया.

मंगलवार को इस जाँच की दूसरी और अंतिम सुनवाई हुई जिसमें गवाहियाँ ली गई हैं जिसके बाद न्यायाधीश चार-पाँच महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे.

पूर्व सूचना

इस सुनवाई में रिक क्रूक नामक एक पूर्व गुप्तचर की गवाही ली गई जो वेंकूवर पुलिस के सदस्य थे.

रिक क्रूक अब रॉयल कनेडियन माउंटेड पुलिस में एक आम कर्मचारी की तरह काम करते हैं.

इस मामले के दो अभियुक्त बरी हो चुके हैं

उन्होंने गवाही में बताया है कि उनके पास इस बारे में निश्चित सूचना थी कि एयर इंडिया के कनिष्क विमान को निशाना बनाया जाएगा.

उन्होंने कहा कि उन्हें 1984 के अंत में एक ऐसे व्यक्ति से ये सूचना मिली जिसे ये उम्मीद थी कि पुलिस की मदद के बदले में उसे ज़मानत मिल जाएगी.

उन्होंने कहा ये जानकारी मिलने के बाद उन्होंने कनाडा के गुप्तचर विभाग को सूचना बढ़ा दी लेकिन किसी ने भी उनसे इस बारे में कोई संपर्क नहीं किया.

23 जून 1985 को जब उन्होंने रेडियो पर विस्फोट की ख़बर सुनी तो उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ.

अटलांटिक महासागर के ऊपर इस विमान में हुए विस्फोट में उसपर सवार सभी 329 लोग मारे गए थे.

कनाडा की सुरक्षा सेवाओं ने हमेशा इस बात से इनकार किया है कि उन्हें हमले के बारे में किसी तरह की कोई चेतावनी मिली थी.

इस जाँच में पेश किए जानेवाले दस्तावेज़ों को देखनेवाले कुछ लोगों का कहना है कि सुनवाई के दौरान कई और गवाहियाँ होंगी जिनमें ये आरोप लगाया जाएगा कि कनाडा के अधिकारियों को हमले की चेतावनी मिली थी लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया.

कनिष्क मामला कनाडा के इतिहास का सबसे लंबा और सबसे महँगा मुक़दमा है और इस मामले में दो ऐसे अभियुक्त बरी हो चुके हैं जिनपर इस हमले में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप लगा था.

लेकिन पीड़ितों के परिवारवालों ने ये आरोप लगाया कि पुलिस ने जाँच के काम में कोताही बरती जिसके बाद पिछले साल इस मामले को लेकर अधिकारियों के रवैये की जाँच शुरू की गई जिसपर कुछ महीनों में रिपोर्ट आ जाएगी.

 
 
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