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शनिवार, 17 फ़रवरी, 2007 को 01:46 GMT तक के समाचार
 
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तुर्की धमाके:सात को आजीवन कारावास
 
धमाके
ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने फ़ैसले का स्वागत किया है
तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में लगभग चार साल पहले हुए बम धमाकों के मामले में सात लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई है.

वर्ष 2003 में हुए इन धमाकों में ब्रिटेन के वाणिज्य दूत समेत 58 लोग मारे गए थे.

सीरियाई नागरिक लोआ अल सक़ा को ब्रितानी वाणिज्य दूतावास, दो यहूदी धार्मिक स्थानों और एचएसबीसी बैंक की शाखा पर हमले में मुख्य भूमिका निभाने और इसके लिए पैसा इकठ्ठा करने का दोषी पाया गया.

बाकी छह तुर्की के ही नागरिक हैं. इन्हें बम रखने और विस्फोट करने का दोषी पाया गया.

इस मामले में कुल 74 लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाया गया जिनमें से कईयों को हल्की सज़ा दी गई जबकि 26 को रिहा कर दिया गया.

जब खचाखच भरी अदालत में सज़ा सुनाई जा रही थी तब कुछ अभियुक्तों ने 'गॉड इज ग्रेट' के नारे लगाए.

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि भविष्य में सक़ा समेत पाँच दोषियों की सज़ा में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा और ना ही उन्हें कोई और रियायत दी जाएगी.

सुनवाई

अभियोग पक्ष ने अदालत में दलील दी कि 'वारियर्स फॉर इस्लाम' के नाम पर कुछ लोगों के समूह ने ओसामा बिन लादेन के आदेश पर इस धमाकों को अंजाम दिया.

सुनवाई के दौरान कुछ अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामी चरमपंथियों के प्रशिक्षण शिविरों में हिस्सा लिया था लेकिन एक अभियुक्त ने इस्तांबुल धमाकों में किसी तरह शामिल होने से इनकार किया.

एक अभियुक्त हारुन इल्हान ने विस्फोट की साजिश रचने और अल क़ायदा का सदस्य होने की बात क़बूल की.

जबकि सक़ा के बारे में अभियोजन पक्ष का कहना था कि वो अल क़ायदा का वरिष्ठ सदस्य है.

सक़ा ने सुनवाई के दौरान एक बार कहा, "ओ मेरे हीरो भाईयों, मेरे लिए चिंता मत करो. जीत बेहद क़रीब है."

ब्रिटेन के विदेश मंत्री मार्गरेट बेकेट ने अदालत के फ़ैसले का स्वागत किया है.

 
 
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