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तेल मंत्री बनाने के मंसूबे पर फिरा पानी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान के तेल मंत्री के पद के लिए, राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की ओर से मनोनीत किए गए तीसरे उम्मीदवार के नाम को भी ईरानी संसद की स्वीकृति नहीं मिली है. ईरान में तेल मंत्री का पद काफ़ी अहम माना जाता है और पिछले तीन महीने से इस पद पर कोई नहीं है. ईरान दुनिया का चौथा सबसे पड़ा तेल उत्पादक देश है. इससे पहले जिन दो लोगों को राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने इस पद के लिए मनोनीत किया था, उनके नाम को संसद ने ये कहते हुए स्वीकृति नहीं दी कि उनके पास इस काम के लिए पर्याप्त अनुभव नहीं है. संसद के लगभग दो-तिहाई सदस्यों ने राष्ट्रपति अहमदीनेजाद के उम्मीदवार मोहसिन तासालोटी के ख़िलाफ़ वोट दिया. तासालोटी पर आरोप है कि वे अमरीका और ब्रिटेन के क़रीब हैं लेकिन वे इन आरोपो का खंडन करते हैं. अभूतपूर्व चुनौती बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में राष्ट्रपति के तीन उम्मीदवारों को संसद की स्वीकृति न मिलना राष्ट्रपति के लिए अभूतपूर्व चुनौती है और उनके लिए शर्मिंदगी की बात भी है. बीबीसी संवाददाता के अनुसार राष्ट्रपति और संसद के बीच चल रहे तनाव का ये ताज़ा मामला है. उनका कहना है कि माना जा रहा था कि राष्ट्रपति अहमदीनेजाद के राष्ट्रपति बन जाने के बाद, ईरान में कट्टरपंथी और उदारवादी धड़ों के बीच तनाव घटेगा. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जैसे-जैसे राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने अपने दोस्तों और जानकारों को अहम पदों पर नियुक्त करना शुरु किया है वैसे-वैसे तनाव घटने की जगह बढ़ गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें मेयर से राष्ट्रपति तक का सफ़र25 जून, 2005 | पहला पन्ना मतदान केंद्रों पर वोटरों की लंबी क़तारें24 जून, 2005 | पहला पन्ना तेहरान के जग्गू चावला का क्रिकेट प्रेम 21 जून, 2005 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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