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गुरुवार, 13 अक्तूबर, 2005 को 01:16 GMT तक के समाचार
 
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'चिट्ठी अल क़ायदा की नहीं'
 
ज़वाहिरी
ज़वाहिरी ओसामा के बाद अल क़ायदा के दूसरे सबसे बड़े नेता माने जाते हैं
बुधवार को अमरीकी ख़ुफ़िया अधिकारियों ने "अल क़ायदा के दूसरे सबसे बड़े नेता की चिट्ठी" प्रकाशित की थी, अब अल क़ायदा से जुड़ी समझी जाने वाली एक वेबसाइट ने उसे ग़लत बताया है.

वेबसाइट का कहना है कि अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियों ने एक फ़र्जी दस्तावेज़ को अयमन अल ज़वाहिरी का ख़त बताया है.

जिसे अयमन अल ज़वाहिरी की चिट्ठी बताया जा रहा था उसमें उन्होंने इराक़ में विद्रोहियों की रणनीति पर सवाल उठाए गए थे.

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि अबू मुसाब अल ज़रकावी को अरबी में लिखी इस चिट्ठी में शियाओं के खिलाफ़ हिंसा और बंधकों की हत्या के प्रभावों की चर्चा की गई थी.

इस चिट्ठी के बारे में जानकारी पिछले सप्ताह आई थी, अब लगभग छह हज़ार शब्दों वाली चिट्ठी को सार्वजनिक कर दिया गया.

अमरीकी अधिकारी दावा कर रहे हैं कि यह चिट्ठी ताज़ा है और ज़वाहिरी ने ही ज़रकावी को लिखी है लेकिन स्वतंत्र सूत्रों से न तो अमरीकी ख़ुफ़िय़ा एजेंसी के दावे या अल क़ायदा के कथित खंडन की पुष्टि संभव है.

'इराक़ में अल क़ायदा के उद्देश्य'
अमरीकियों को इराक़ से निकालना
वहाँ इस्लामी हुकूमत क़ायम करना
जिहाद इराक़ के पड़ोसी देशों में ले जाना
इसराइल के ख़िलाफ़ कार्रवाई करना

ख़ुफ़िया अधिकारियों का कहना है कि यह पत्र अल क़ायदा की विचारधारा की नायाब झलक पेश करता है.

शुरू में इस पत्र के कुछ अंश जारी किए गए थे, अब अमरीकी ख़ुफ़िया विभाग के निदेशक ने इस पूरे पत्र को अरबी और अँगरेज़ी में अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित कर दिया.

अमरीकी अधिकारी यह बताने को तैयार नहीं है कि उन्हें यह पत्र कब और कैसे मिला, सिर्फ़ इतना बताया गया है कि यह इराक़ में एक सैनिक कार्रवाई के दौरान हाथ आया.

यह पत्र सीधे ज़रकावी को संबोधित नहीं है लेकिन अमरीकी अधिकारी मानते हैं कि यह उन्हीं के लिए लिखा गया था.

इस पत्र को पढ़ने के बाद अमरीकी अधिकारियों ने निष्कर्ष निकाला है कि अल क़ायदा का केंद्रीय नेतृत्व इराक़ में होने वाली गतिविधियों को क़ाबू में रखने की कोशिश कर रहा है.

लक्ष्य

इस पत्र में इराक़ में अल क़ायदा के नेता को बताया गया कि उनके चार लक्ष्य हैं-- अमरीकियों को इराक़ से निकालना, वहाँ इस्लामी हुकूमत क़ायम करना, जिहाद को इराक़ के पड़ोसी देशों में ले जाना और इसराइल के ख़िलाफ़ कार्रवाई करना.

इस पत्र में यह भी कहा गया है कि इन कामों के लिए आम लोगों के समर्थन की भी ज़रूरत है इसलिए ऐसे कामों से परहेज़ किया जाए जिनसे जनता उनके ख़िलाफ़ हो सकती है, इसमें संकेत दिए गए हैं कि क्रूर छवि बनने से नुक़सान हो सकता है.

क्या यह पत्र ज़रकावी को ही लिखा गया था, ज़रकावी को यह पत्र मिला या नहीं, इस पर उनकी क्या प्रतिक्रिया रही, ये सारे सवाल अनुत्तरित हैं.

इस पत्र में एक और अहम बात ये है कि अल क़ायदा के नेताओं की मुश्किलों का ज़िक्र, इसमें कहा गया है कि पाकिस्तानी सेना की कार्रवाइयों से 'वास्तविक ख़तरा' पैदा हो गया है.

 
 
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