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गुरुवार, 23 जून, 2005 को 07:05 GMT तक के समाचार
 
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बग़दाद में फिर बम फटे, 15 की मौत
 
इराक़
इराक़ में नई सरकार के गठन के बाद से अभी तक 1000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.
इराक़ की राजधानी बग़दाद में गुरूवार को भी कार बम धमाके हुए.

गुरूवार को हुए तीन कार बम धमाकों में बग़दाद में कम-से-कम 15 लोग मारे गए हैं और 50 घायल हो गए.

गुरूवार को एक कार बम से गश्त लगा रहे सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाया गया जिसमें तीन पुलिसकर्मी मारे गए.

वहीं एक बम एक शिया मस्जिद के पास फटा जबकि तीसरा बम एक हमाम या स्नान घर के निकट फटा.

 आनेवाले दिनों में अगर इराक़ में चरमपंथ ख़त्म हो जाता है और जिहादियों को वहाँ से भागना पड़ता है तो ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने ख़तरा और बढ़ जाएगा.
 
सीआईए की रिपोर्ट

एक दिन पहले ही बग़दाद के एक शिया इलाक़े में एक-के-बाद-एक कई कार बम फटे थे जिनमें 18 लोगों की जान चली गई थी.

बुधवार को जिस दिन ये हमले हुए उसी दिन बेल्जियम की राजधानी बसेल्स में इराक़ के भविष्य के बारे में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हो रहा था.

इस बीच इराक़ में जारी हिंसा के बीच ही अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि इराक़ में ऐसे इस्लामी जेहादी तैयार हो रहे हैं जो दूसरे देशों को अस्थिर कर सकते हैं.

रिपोर्ट

इराकी महिला
लगभग हर दिन ही इराक़ में हो रहे हैं कार बम धमाके

सीआईए की एक रिपोर्ट में ये कहा गया है कि इराक़ की स्थिति अफ़ग़ानिस्तान से अधिक ख़राब है जिससे ओसामा बिन लादेन के गुट को बढ़ावा मिला है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक़ी और विदेशी हमलावर इराक़ी शहरों में कार बम धमाके और पुलिस व सैनिक ठिकानों पर हमले के नए तरीक़े सीख रहे हैं.

सीआईए का कहना है कि आनेवाले दिनों में अगर इराक़ में चरमपंथ ख़त्म हो जाता है और जिहादियों को वहाँ से भागना पड़ता है तो ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने ख़तरा और बढ़ जाएगा.

सम्मेलन

यूरोपीय संघ और अमरीका की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने इराक़ी जनता को भरोसा दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय उनके साथ है.

वहीं अमरीका की विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने इराक़ के पड़ोसी देशों और विशेष रूप से सीरिया से कहा कि वह चरमपंथियों पर लगाम लगाने के लिए और प्रयास करे.

इसी सम्मेलन में मिस्र और जोर्डन ने अपने राजदूत इराक़ भेजने की घोषणा की.

इराक़ से सद्दाम हुसैन के शासन की समाप्ति के बाद वहाँ अपने राजदूत भेजने का फ़ैसला करनेवाले ये दोनों पहले देश हैं.

 
 
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