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सोमवार, 18 अप्रैल, 2005 को 04:49 GMT तक के समाचार
 
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पोप के चुनाव की प्रक्रिया की शुरुआत
 
धर्मगुरू
धर्मगुरूओं का कहना है कि वे 'परमात्मा की आवाज़ सुनकर फ़ैसला करेंगे'
रोमन कैथोलिक चर्च के 115 कार्डिनल जो पोप के लिए मतदान कर सकते हैं, अब चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत के तहत वैटिकन के सिस्टीन चैपेल में प्रवेश कर चुके हैं.

पोप के चयन के लिए होने वाली बैठक की प्रक्रिया पूरी तरह से गोपनीय होती है और इसे 'कॉन्क्लेव' कहा जाता है.

इस प्रक्रिया में भाग लेने वाले कार्डिनल सिस्टीन चैपल के भीतर ही रहेंगे और बाक़ी दुनिया से उनका कोई संपर्क नहीं रहेगा, वे गुप्त मतदान के ज़रिए रोमन कैथलिक समुदाय के अगले शीर्ष धर्मगुरू का चुनाव करेंगे.

256वें पोप का नाम सामने आने में कितना समय लगेगा इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है लेकिन कहा जा रहा है कि यह प्रक्रिया कुछ दिनों से लेकर महीनों तक चल सकती है.

इससे पहले रोम में कैथलिक धर्मगुरूओं ने अगले पोप के चुनाव की प्रक्रिया में शामिल होने से पहले एक विशेष प्रार्थना सभा में भाग लिया है.

इस दौरान प्रमुख उम्मीदवार माने जा रहे कार्डिनल जोसेफ़ रैत्ज़िंगर ने कहा कि नैतिकता के मुद्दे पर कोई भी समझौता किए जाना ख़तरनाक होगा.

उन्होंने कहा कि मूल्यों के बदलाव के इस दौर में चर्च द्वारा निर्धारित मान्यताओं का पालन किया जाना चाहिए.

 लोग सोचते हैं कि हम चुनाव की तरह वोट डालेंगे लेकिन उससे बहुत अलग है, हम वहाँ ईश्वर और अंतररात्मा की आवाज़ सुनेंगे
 
एक कार्डिनल

सिस्टीन चैपल में होने वाली इस कार्यवाही की जानकारी बाहरी दुनिया तक नहीं पहुँचे इसके लिए कड़े उपाय किए गए हैं, इसके लिए सभी धर्मगुरूओं और उनके संपर्क में आने वाले कर्मचारियों ने मौन रखने की प्रतिज्ञा की है.

वैटिकन के कुछ इलाकों को पूरी तरह सील कर दिया गया है, चैपल के अंदर अख़बार, टीवी, मोबाइल फ़ोन आदि का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है, इतना ही नहीं, चैपल की पूरी जाँच की गई है कि कहीं कैमरे या माइक्रोफ़ोन तो नहीं छिपाए गए हैं.

यह पूरी प्रक्रिया पोप जॉन पॉल द्वितीय के निधन के सोलह दिन बाद शुरू हो रही है.

ज़्यादातर कार्डिनल वैटिकन के भीतर ही बने एक होटल में ठहरे हैं जिसे पोप जॉन पॉल द्वितीय ने इसी उद्देश्य से बनाने के निर्देश दिए थे कि अगले पोप के चुनाव में भाग लेने वाले कार्डिनल वहाँ आराम कर सकें.

अनूठी प्रक्रिया

रविवार को लातीनी अमरीकी देश हांडूरस के कार्डिनल आंद्रेस रॉड्रिग्स ने कहा, "लोग सोचते हैं कि हम चुनाव की तरह वोट डालेंगे लेकिन उससे बहुत अलग है, हम वहाँ ईश्वर और अंतररात्मा की आवाज़ सुनेंगे."

कुछ जानकारों का कहना है कि इस बार के पोप के चुनाव में उदारवादी और कट्टरपंथी धर्मगुरूओं के बीच तकरार हो सकती है और 'कॉन्क्लेव' लंबा खिंच सकता है.

पोप के चुनाव के बारे में असली संकेत वैटिकन के सिस्टीन चैपल से उठने वाले धुएँ से मिलेगा, अगर धुएँ का रंग काला हुआ तो पोप का चुनाव अभी नहीं हो पाया है जबकि सफ़ेद रंग के धुएँ का आशय है कि नया पोप चुन लिया गया है.

यह धुआँ मतपत्रों के जलने से होता है और उसमें रसायन मिलाए जाते हैं जिससे धुएँ का रंग तय होता है, हज़ारों लोग वैटिकन में इसी उद्देश्य से लगाई गई चिमनी पर नज़रें गड़ाए कई दिनों तक बैठे रहेंगे.

मतदान के विवरण को नए पोप के चुनाव के एक सौ वर्ष बाद ही जारी किया जाता है, उससे पहले तक यह गोपनीय होता है.

 
 
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