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शुक्रवार, 01 अप्रैल, 2005 को 13:48 GMT तक के समाचार
 
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क्या होगा पोप के बाद
 
पोप जॉन पॉल द्वितीय
सबसे लंबे समय तक पोप रहे हैं जॉन पॉल द्वितीय
पोप जॉन पॉल द्वितीय का निधन दुनिया भर के कार्डिनलों के लिए संकेत होगा कि वो अपना सामान बांध कर वैटिकन रवाना हो जाएं.

इन सभी को पोप की अंत्येष्टि में शामिल होना होगा और नौ दिन के आधिकारिक शोक में भी. इसके बाद सभी कार्डिनल मिलकर चुनेंगे नया पोप.

इस पूरे आधिकारिक समारोह में सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी होती है उस कार्डिनल पर जिसे चैम्बरलेन या कैमरलेंगो कहा जाता है.

चैम्बरलेन का सबसे पहला काम होता है पोप का घर और उनके पूरे सामान को सील कर देना. पोप की फिशरमैन अंगूठी और उनकी मुहर को तोड़ना.

वैसे यह काम भले ही आज के युग में प्रतीकात्मक होता हो लेकिन पुराने ज़माने में यह आवश्यक होता था क्योंकि मुहर की नकल पूरे वैटिकन को मंहगी पड़ सकती थी. इसके बाद चैम्बरलेन का काम होता है पूरी चुनाव प्रक्रिया की निगरानी करना.

कैथोलिक धर्म में कार्डिनल का स्थान बहुत ऊंचा होता है और इन्हें चर्च का राजकुमार भी कहा जाता है. इनमें शामिल होते हैं प्रमुख शहरों के आर्चबिशप और वैटिकन के विभिन्न महकमों के प्रमुख.

इन्हीं कार्डिनलों में से पोप का चयन भी किया जाता है लेकिन किसी को अंतिम समय तक पता नहीं होता कि कौन बनेगा अगला पोप.

यूरोप से हमेशा बड़े ही मज़बूत उम्मीदवार रहे हैं लेकिन अब अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया से भी कई कार्डिनल इस दौड़ में शामिल हो गए हैं. यही कारण है कि अफवाहों का बाज़ार गर्म है कि दुनिया के एक अरब कैथोलिकों के धर्मगुरु इस बार विकासशील देश से हो सकते हैं.

परंपरा के अनुसार जब पोप की मृत देह लाई जाती है तो उनका धार्मिक नाम लेकर तीन बार पुकारा जाता है और अगर कोई आवाज़ नहीं आई तो पोप को मृत मान लिया जाता है. पुराने जमाने में पोप के सिर पर चांदी का एक हथौड़ा तीन बार हौले हौले मारा भी जाता था.

पोप के मरने की ख़बर को लेकर बहुत कठोर प्रोटोकॉल होता है. चर्च प्रशासन कुरिया दुनिया भर के राजदूतों और राष्ट्राध्यक्षों को पोप के मरने की सूचना देता है और वैटिकन रेडियो पर इसका समाचार प्रसारित किया जाता है.

पोप के मरने के बाद सभी की आंखे कार्डिनलों पर लगी होती हैं जिन्हें नियुक्ति निज़ी तौर पर पोप ही करते हैं. सभी कार्डिनल बैठते हैं सिस्टाइन चैपल में जहां नए पोप का चयन किया जाता है.

इस चुनाव में वही कार्डिनल हिस्सा ले सकते हैं जिनकी उम्र 80 से कम होती है. सभी कार्डिनल पुरुष ही होते हैं यानी नया पोप भी पुरुष ही होगा इतना तय है.

इस समय दुनिया भर में 184 कार्डिनल होते हैं लेकिन पोप के चयन में हिस्सा सिर्फ 117 कार्डिनल ही लेंगे क्योंकि बाकी 66 कार्डिनलों की उम्र 80 से अधिक है.

पोप की मौत के बाद वैटिकन द्वारा की गई सभी नियुक्तियां रद्द मान ली जाती हैं. इन पदों पर बने लोग इंतज़ार करते हैं अगले पोप का जो उनकी नियुक्ति की फिर से पुष्टि भी कर सकता है या उन्हें हटा भी सकता है.

इस बीच चर्च को चलाने की ज़िम्मेदारी कार्डिनलों की होती है लेकिन वो पोप के चयन के नियम नहीं बदल सकते हैं.

 
 
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