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बुधवार, 29 दिसंबर, 2004 को 23:15 GMT तक के समाचार
 
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हज़ारों एटम बमों के बराबर थी ऊर्जा
 
परमाणु बम
एक परमाणु बम से लाखों लोग मरते हैं, यहां तो साढ़े नौ हज़ार एक साथ फटे
हिंद महासागर में आए भूकंप के बाद राहत कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है लेकिन प्रारंभिक वैज्ञानिक विश्लेषण से चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं.

कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इस भूकंप में धरती से इतनी ऊर्जा निकली है जो साढ़े नौ हज़ार परमाणु बमों से निकली उर्जा के बराबर है.

वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि भूकंप इतना शक्तिशाली था कि इसके झटके से संभवत: पृथ्वी अपनी धुरी पर कुछ कंपकंपा कर रह गई.

भूकंप से धरती के हिस्सों का खिसकना तो आम बात है. मगर यह भी माना जा रहा है कि 26 दिसंबर को आए समुद्री भूकंप के झटके से हिंद महासागर के कुछ छोटे द्वीप अपनी जगह से कई मीटर तक खिसक गए.

भूवैज्ञानिकों को चिंता है कि इसके प्रभाव और गंभीर हो सकते है.

अमरीकी भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग के प्रमुख आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि हो सकता है भूकंप ने क्षेत्र के कुछ द्वीपों को उपर उठा दिया हो.

उनका कहना है कि इससे क्षेत्र में समुद्र का स्तर बढ़ जाएगा जिससे इन इलाकों में सहायता पहुंचाने वाले पोतों के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है.

यह कुछ प्रारंभिक नतीजे हैं. अमरीकी वैज्ञानिकों का दल भूकंप के परिणामों का विस्तृत विश्लेषण आने वाले कुछ हफ़्तों में पेश करेगा.

राहत कार्य

कोलिन पावेल
मदद करने वाले देशों में आगे है अमरीका

उधर अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने कहा है कि हिंद महासागर में सूनामी के कहर के बाद राहत और पुनर्वास कार्य के लिए बहुत बड़ी धनराशि की ज़रूरत पड़ेगी.

अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा के बाद दुनिया भर के देशों को एकजुट होकर एक बहुत बड़ा राहत कार्यक्रम चलाना होगा.

बीबीसी के साथ एक बातचीत में पॉवेल ने कहा है कि "शुरूआती तौर पर मानवीय त्रासदी से लोगों को उबारने का काम करना होगा लेकिन दूसरे दौर में दीर्घकालिक कार्रवाई होगी जिसका उद्देश्य तबाह हुई सुविधाओं को दोबारा बहाल करना होगा."

अमरीकी विदेश मंत्री ने बताया कि सहायता पहुँचाने के लिए अमरीका ने तीन प्रमुख देशों के साथ मिलकर एक समूह बनाया है जो राहत के काम की निगरानी करेगा.

ये तीन देश हैं--भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया.

अपील

पॉवेल ने कहा कि यह समूह संयुक्त राष्ट्र और दूसरी सहायता एजेंसियों के साथ सहयोग करके काम करेगा और उन स्थानों पर सहायता पहुँचाने की कोशिश करेगा जहाँ उसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है.

श्रीलंका में भी बहुत सारा प्रभावित क्षेत्र में संपर्क स्थापित नहीं हुआ है
श्रीलंका में पीड़ित महिला

कॉलिन पॉवेल ने धनी देशों से अपील की कि वे इस आपदा से निबटने में सहायता करें, उन्होंने कहा कि "जिन देशों के पास साधन हैं यह उनकी नैतिक ज़िम्मेदारी है कि वे आगे आएँ."

सूनामी लहरों से हुई तबाही के बारे भयावह जानकारियों के आने का सिलसिला जारी है और जैसे-जैसे तस्वीर साफ़ हो रही है इस आपदा की मार का अनुमान लग रहा है.

भारी तबाही

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों का अनुमान है कि हिंद महासागर के आसपास बसे ग्यारह देशों में कम से कम अस्सी हज़ार लोग मारे जा चुके हैं.

अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसी रेडक्रॉस का तो अनुमान है कि इस आपदा में एक लाख तक लोग मारे जा चुके हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि इस आपदा के बाद कम से कम तीस लाख लोग ऐसे हैं जिन तक तत्काल सहायता पहुँचाए जाने की ज़रूरत है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने गंदे पानी और लाशों के सड़ने से महामारी फैलने की आशंका भी जताई है और कहा है कि इसके लिए जल्दी ही ठोस उपाय करने होंगे वर्ना बड़ी संख्या में लोग संक्रामक रोगों की चपेट में आ जाएँगे.

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