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मंगलवार, 28 दिसंबर, 2004 को 19:02 GMT तक के समाचार
 
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ईमेल में उतर कर आया हादसे का दर्द
 
शवों का अंतिम संस्कार सबसे बड़ी समस्या बन गई है
हिंद महासागर में आए भूकंप की विभीषिका से निपटने के लिए कई सहायता एजेंसियाँ जुटीं हुईं हैं. लेकिन उन पर भी काफ़ी दबाव है.

अभी तक हज़ारों लोग मारे गए हैं और लाखों लोग बेघर हो गए हैं. हज़ारों लोगों का कोई अता-पता नहीं है.

इस भूकंप का असर इंडोनेशिया से लेकर सुदूर सोमालिया तक महसूस किया गया. प्रभावित इलाक़ों से बीबीसी को बड़ी संख्या में ईमेल आ रहे हैं.

कई लोगों ने ईमेल में बताया है कि वे कैसी स्थिति में रह रहे हैं और क्या उन्होंने देखा और भुगता.

कुछ लोगों ने तो अपने ईमेल में उन तक तुरंत सहायता पहुँचाए जाने की अपील की है. इंडोनेशिया के आचे प्रांत में भूकंप से बड़े पैमाने पर तबाही हुई है.

भुखमरी

जकार्ता से ट्रिस ने अपने ईमेल में बताया है कि अभी तक आचे प्रांत की राजधानी तक भी सहायता नहीं पहुँच पाई है.

ट्रिस ने बताया है कि कैसे कई दिनों से भूखे लोगों ने एक सब्जियों की दुकान में घुस गए. हालाँकि वहाँ भी सब कुछ ठीक नहीं था. लेकिन लोगों ने कीचड़ और पानी में मौजूद सब्जियों को ही एक-दूसरे से छीनना-झपटना शुरू कर दिया.

 कई दिनों से भूखे लोगों ने एक सब्जियों की दुकान में घुस गए. हालाँकि वहाँ भी सब कुछ ठीक नहीं था. लेकिन लोगों ने कीचड़ और पानी में मौजूद सब्जियों को ही एक-दूसरे से छीनना-झपटना शुरू कर दिया
 
जकार्ता से ट्रिस का ईमेल

जकार्ता से ही केविन कार्तासस्मिता ने लिखा है कि आचे के कई लोग भूख से मर रहे हैं. क्योंकि वे समुद्री लहरों से इतना डर गए हैं कि ऊपरी पहाड़ी इलाक़ों में जाकर बैठे हैं और नीचे नहीं आना चाहते.

चेन्नई से विजय लिखते हैं कि बड़ी संख्या में शव अभी भी सार्वजनिक रूप से पड़े हुए हैं. लोग सामूहिक तौर पर इन शवों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं.

उन्होंने लिखा है कि यह दुखदायी है कि लोग अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार परंपरा के मुताबिक़ भी नहीं कर पा रहे.

विजय ने लिखा है कि इलाक़े में तबाही का मंज़र तो है ही साथ ही दूषित हवा ने जीना और मुश्किल कर दिया है.

श्रीलंका के किलीनोची में मेडिकल के छात्र बाला करुणाकरन अपनी ईमेल में लिखते हैं कि जिस अस्पताल में वे काम कर रहे हैं वहाँ जगह की कमी तो है ही संसाधन भी कम हैं.

उन्होंने लिखा है कि कई इलाकों में तो बड़ी संख्या में शव पड़े हुए हैं. श्रीलंका से ही रोशन गुणरत्ने लिखते हैं कि यह उनके देश के लिए विपत्ति का समय है.

 
 
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