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सोमवार, 15 नवंबर, 2004 को 18:40 GMT तक के समाचार
 
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कॉलिन पॉवेलः एक नरम और उदार चेहरा
 
कॉलिन पॉवेल
पॉवेल ने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान संयम और सतर्कता पर ज़ोर दिया
बुश प्रशासन में कॉलिन पॉवेल को उदार व्यक्ति के रूप में देखा जाता रहा है, ख़ास तौर पर इराक़ के मामले में.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वे काफ़ी लोकप्रिय थे, अमरीकी जनता उन्हें एक सम्मानीय व्यक्ति के रूप में देखती रही है लेकिन उप राष्ट्रपति डिक चेनी और रक्षा उप मंत्री पॉल वुल्फ़ोवित्ज़ जैसे दक्षिणपंथी माने जाने वाले नेता उन पर हावी रहे.

मिसाल के तौर पर 2002 में जब अमरीकी प्रशासन ने सद्दाम हुसैन के हथियारों के जखीरे की बात कही तो पॉवेल ने संयम बरतने की बात कही, इससे ज़ाहिर है कि उनके साथी मंत्री नाख़ुश ही हुए.

डिक चेनी और रक्षा मंत्री डॉनल्ड रम्सफ़ेल्ड ने फ़ौरन सैनिक कार्रवाई करने की वकालत की लेकिन पॉवेल ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र का विकल्प समाप्त होने के बाद ही हमले की बात सोचनी चाहिए.

 जब हम लड़ाई में जाते हैं तो हमारे सामने एक उद्देश्य होना चाहिए जिसे लोग समझें और हमारा समर्थन करें
 
कॉलिन पॉवेल

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को महाविनाश के हथियारों का विवाद हल करने देना चाहिए और इराक़ को ख़ुद ही हथियार सौंप देने का एक आख़िरी मौक़ा दिया जाना चाहिए.

लेकिन इसका यह मतलब क़तई नहीं था कि सैनिक जनरल रहे पॉवेल युद्ध से मुँह चुरा रहे थे, कॉलिन पॉवेल बुश सीनियर के ज़माने में जनरल थे जिन्होंने 1991 के खाड़ी युद्ध में अमरीकी सेना का सफल नेतृत्व किया था.

1991 की लड़ाई के समय पॉवेल ज्वाइंट चीफ़ ऑफ़ स्टाफ के पद पर थे जो सेना का शीर्ष पद है और उनका कहना रहा है कि वे अपने अनुभव के आधार पर ही संयम की बात करते हैं.

एक बेहद साधारण परिवार में जन्मे पॉवेल 35 वर्ष तक सेना में रहे हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा को मज़बूत बनाने के पक्षधर रहे हैं, वे 1980 के दशक में राष्ट्रपति रॉनल्ड रीगन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे और उन्होंने स्टारवार्स का समर्थन किया था.

लंबा अनुभव

पॉवेल के लंबे सैनिक अनुभव का ही नतीजा था कि उन्होंने अमरीकी सैनिकों को देश से बाहर भेजने के मामले में सतर्कता बरतने पर ज़ोर दिया.

बुश, रम्सफ़ेल्ड और पॉवेल
कहा जाने लगा था कि बुश और रम्सफ़ेल्ड से उनकी दूरियाँ बढ़ गई थीं

पॉवेल ने हमेशा इस बात पर ज़ोर दिया कि अमरीकी सैनिक उसी हालत में लड़ने के लिए जाएँगे जब उनके वहाँ से बाहर निकलने की स्पष्ट योजना हो और विजय सुनिश्चित हो.

वियतनाम की लड़ाई के बारे में पॉवेल ने अपने संस्मरण में लिखा, "जब हम लड़ाई में जाते हैं तो हमारे सामने एक उद्देश्य होना चाहिए जिसे लोग समझें और हमारा समर्थन करें."

उन्होंने लिखा कि हमें लड़ाई में विजय के लिए जाना चाहिए और पूरे देश के संसाधनों को विजय के लिए जुटाया जाना चाहिए.

पॉवेल के संयम बरतने संबंधी बयानों के बाद कहा जाने लगा था कि बुश प्रशासन में गहरे मतभेद हैं लेकिन पॉवेल ने हमेशा इस तरह की बातों को ग़लत बताया.

सितंबर 2002 में उन्होंने कहा, "मेरा खयाल है कि बहुत सारे मतभेद हो सकते हैं लेकिन ज़्यादातर काल्पनिक हैं और बढ़ा-चढ़ाकर बताए जाते हैं."

बुश प्रशासन में रहने के बावजूद कॉलिन पॉवेल की छवि वैसी नहीं रही जैसी कि एक भूतपूर्व जनरल की हो सकती थी, यहाँ तक कि लोगों ने इस तथ्य को लगभग भुला ही दिया है कि वे एक जनरल रहे हैं.

 
 
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