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बुधवार, 13 अक्तूबर, 2004 को 17:32 GMT तक के समाचार
 
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कई देशों में सक्रिय रहे हैं ज़रक़ावी
 
अबू मुसाब अल ज़रक़ावी का पोस्टर
ज़रक़ावी पर बहुत से हमलों का आरोप है
अब मुसाब अल ज़रक़ावी पर इराक़ में बहुत से विदेशियों के अपहरण और हत्या का शक किया जाता है और ऐसे भी आरोप लगाए जाते हैं कि ज़रक़ावी एक बहुत ही बेरहम व्यक्ति हैं.

अमरीका आरोप लगाता है कि 37 वर्षीय ज़रक़ावी अल क़ायदा के वरिष्ठ सदस्य हैं और इराक़ में बहुत से अपहरणों, हत्याओं और आत्मघाती हमलों के पीछे उनका ही हाथ है.

हालाँकि ज़रक़ावी का संबंध अल क़ायदा से होने का संदेह व्यक्त किया जाता है लेकिन जानकार तौहीद और जेहाद नाम के उनके गुट को अलग संगठन मानते हैं.

कुछ जानकारों का तो ये भी कहना है कि ज़रक़ावी ओसामा बिन लादेन के संगठन अल क़ायदा के प्रतिद्वंद्वी हैं.

अमरीका ने ज़रक़ावी के सिर पर ढाई करोड़ डॉलर का ईनाम रखा है. ध्यान रहे कि इतना ही ईनाम ओसामा बिन लादेन के सिर पर भी रखा हुआ है.

कुछ दिन पहले अमरीकी अधिकारियों को एक ऐसा पत्र मिला था जिससे यह पुष्टि होती है कि ज़रक़ावी इराक़ से अमरिका को बाहर निकालने के लिए काम कर रहे हैं.

ज़रक़ावी और अल क़ायदा

इराक़ पर हमला होने से पहले फ़रवरी 2003 में अमरीकी विदेशमंत्री कॉलिन पॉवेल ने संयुक्त राष्ट्र से कहा था कि कि ज़रक़ावी ओसामा बिन लादेन के एक निकट सहयोगी रह चुके हैं और उन्होंने इराक़ में पनाह ले ली है.

ख़ुफ़िया सूचनाओं में संकेत दिया गया था कि ज़रक़ावी बग़दाद में थे और पॉवेल के अनुसार सद्दाम हुसैन ने अल क़ायदा को संरक्षण दिया हुआ था इसलिए उनके मुताबिक़ इराक़ पर हमला करना सही है.

लेकिन कुछ इतिहासकारों ने अमरीका के इस दावे को ग़लत बताते हुए कहा कि ज़रक़ावी की तो ओसामा बिन लादेन से दुश्मनी रही है.

अल ज़रक़ावी का पोस्टर

ये दोनों ही लोगों को अफ़ग़ानिस्तान में नाम मिला और उन्होंने 1980 के दौर में वहाँ सोवियत संघ की सेनाओं के ख़िलाफ़ 'जिहाद' में हिस्सा लिया.

ज़रक़ावी के बारे में कहा जाता है कि वह जॉर्डन में एक ऐसे युवक के रूप में जाने जाते थे जो सीधा-सादा था और उसे ग़ुस्सा जल्दी आता था.

अफ़ग़ानिस्तान से सोवियत सेनाएँ बाहर निकलने के बाद ज़रक़ावी विद्रोही इस्लामी तेवरों के साथ जॉर्डन लौटे थे.

जॉर्डन में राजतंत्र को उखाड़ने की कोशिश करने के आरोप में ज़रक़ावी को सात साल की क़ैद हुई और क़ैद से छूटने के कुछ ही दिन बाद वह देश से बाहर भाग गए.

अमरीकी और इसराइली पर्यटकों पर हमलों की कथित योजना बनाने के आरोप में ज़रक़ावी पर जॉर्डन में उनकी ग़ैरहाज़िरी में ही मुक़दमा चला और उन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई.

कुछ पश्चिमी देशों की ख़ुफ़िया सूचनाओं से पता चलता है कि ज़रक़ावी ने यूरोप में पनाह लेने की कोशिश की थी.

बाद में जर्मनी के सुरक्षा बलों ने एक ऐसे चरमपंथी गुट का पता लगाया जिसके बारे में कहा गया कि ज़रक़ावी उसके नेता हैं.

बाद में पता चला कि ज़रक़ावी ने एक बार फिर अफ़गानिस्तान की तरफ़ रुख़ किया और वहाँ कुछ चरमपंथी प्रशिक्षण शिविर भी चलाए थे.

कहा जाता है कि अफ़ग़ानिस्तान में एक अमरीकी मिसाइल हमले में ज़रक़ावी की एक टाँग जाती रही जिसके बाद 2001 में वह इराक़ की तरफ़ रवाना हो गए.

अमरीकी अधिकारियों का तर्क है कि ज़रक़ावी अल क़ायदे के कहने पर ही इराक़ पहुँचे और वहाँ उन्होंने एक कुर्द संगठन अंसार अल आलम के साथ गठजोड़ किया.

 
 
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