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शनिवार, 02 अक्तूबर, 2004 को 09:00 GMT तक के समाचार
 
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नाइजीरिया में बाग़ी संघर्ष विराम को राज़ी
 
विद्रोही नेता मुजाहिद असारी
असारी का कहना है कि सरकार से समझौता हो गया है
नाइजीरिया की सरकार ने इस बात की पुष्टि की है कि देश के तेल उत्पादक क्षेत्र में सक्रिय विद्रोही संगठन संघर्ष विराम के लिए राज़ी हो गए हैं.

इस समझौते के बाद उम्मीद बँधी है कि सरकारी सैनिकों और विद्रोहियों के बीच महीनों से चल रही लड़ाई बंद हो जाएगी और तेल ठिकानों को विद्रोही निशाना नहीं बनाएँगे.

विदेशी तेल कंपनियों को मिली धमकी के कारण पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत में उछाल आ गई थी जो अब भी जारी है.

एक प्रमुख विद्रोही नेता मुजाहिद दोकूबो असारी ने बताया कि पहली बार सरकार ने इस बात को स्वीकार किया है कि देश के कई संगठनों को अपने मामलों में निर्णय करने का अधिकार है और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण के मामलें में भी भूमिका है.

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघर्ष विराम समझौते के बावजूद वे अभी भी विदेशी तेल कंपनियों के इलाक़े में काम करने के ख़िलाफ़ हैं.

सरकार और विद्रोही गुटों के बीच हुए समझौते में यह भी कहा गया है कि सरकार इस इलाक़े के विकास के लिए काम करेगी.

तेल उत्पादन

नाइजीरिया में तेल उत्पादन में आई रुकावट और इसे लेकर बनी आशंकाओं के कारण शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमत प्रति बैरल 50 डॉलर से भी ज़्यादा हो गई.

विद्रोहियों ने विदेशी तेल कंपनियों को चेतावनी दी थी

पहले विद्रोही गुट नाइजर डेल्टा पीपुल्स वोलेन्टियर फ़ोर्स के नेता मुजाहिद दोकुबो असारी ने धमकी दी थी कि अगर इलाक़े के लोगों को देश की तेल संपत्ति में हिस्सा नहीं दिया गया तो व्यापक लड़ाई छिड़ जाएगी.

लेकिन राष्ट्रपति ओलूसेगन ओबसांजो ने कहा था कि उन्हें इलाक़े में हिंसा ख़त्म होने की पूरी उम्मीद है.

समझौता होने के बाद राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि असारी विद्रोही गुटों को ख़त्म करने और हथियार डालने के लिए भी तैयार हो गए हैं. लेकिन विद्रोहियों ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार इस बयान में कहा गया है, "विद्रोही गुटों ने राष्ट्रपति के शांति प्रस्ताव पर अपनी प्रतिबद्धता जताई है. गुट अपने और देश के सामाजिक और आर्थिक हितों के ख़िलाफ़ हिंसा ख़त्म करने को तैयार हो गए हैं."

असारी ने चेतावनी दी थी कि शुक्रवार तक सभी विदेशी तेल कंपनियाँ अपना काम बंद कर दे.

इस चेतावनी को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतें बढ़ने का प्रमुख कारण माना जा रहा था.

 
 
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