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बॉस की वजह से नौकरी छोड़ते हैं
 
ब्रितानी पुलिस
पुलिस में भी भेदभाव के आरोप हैं
यह समस्या तो भारत सहित बहुत से देशों में हो सकती है लेकिन ब्रिटेन में ख़ुद एक सरकारी रिपोर्ट में इसे स्वीकार किया गया है कि पुलिस में बहुत से लोग अपने वरिष्ठ अधिकारियों के फ़ैसलों से ख़ुश नहीं होते.

ब्रिटेन के गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जो पुलिस अधिकारी नौकरी छोड़ते हैं उनमें से क़रीब 80 प्रतिशत अपने वरिष्ठ अधिकारियों और प्रबंधन से नाख़ुश होकर ऐसा करते हैं.

यानी नौकरी छोड़ने वाले पाँच पुलिस अधिकारियों में से चार को यह शिकायत होती है कि उनके वरिष्ठ अधिकारी या बॉस "निष्पक्ष नहीं होते और अपने काम में असरदार भी नहीं."

रिपोर्ट का कहना है कि ब्रिटेन में पुलिस में भर्ती का स्तर तो तेज़ी से बढ़ रहा है लेकिन चिंता की बात ये भी है कि पुलिस की नौकरी छोड़ने वालों की संख्या भी तेज़ी से बढ़ रही है.

और इस्तीफ़ा देने वालों में भारी संख्या अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारियों की थी.

यह रिपोर्ट इंगलैंड और वेल्स में दस पुलिस बलों में सर्वेक्षण करके तैयार की गई है जिसमें बहुत से बीट अधिकारियों की शिकायत थी कि उनकी कोई क़द्र नहीं है.

नए भर्ती होने वाले बहुत से अधिकारियों ने नज़रअंदाज़ होने और वरिष्ठ अधिकारियों का पूरा समर्थन और सहयोग नहीं मिलने की शिकायत की तो कुछ ने कहा कि वे उच्च स्तर के अधिकारियों और बहुत सी नीतियों की वजह से ख़ुद भयभीत महसूस करते हैं.

रिपोर्ट कहती है कि पुलिस की नौकरी छोड़ने की यह मजबूरी काले और एशियाई मूल के पुलिस अधिकारियों - महिला और पुरुष दोनों में ज़्यादा देखी गई, बनिस्बत उनके श्वेत अंग्रेज़ सहयोगियों के.

रिपोर्ट का तर्क है कि नौकरी छोड़ने के फ़ैसले के पीछे बड़ी वजह यह हो सकती है कि उनके साथ भेदभाव किया गया हो और बेजा सख़्ती बरती गई हो.

दूसरी तरफ़ सरकार का लक्ष्य है कि 2009 तक पुलिस बलों में अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व 25.9 प्रतिशत होना चाहिए.

2002-2003 में अल्पसंख्यक पृष्ठभूमि के पुलिस अधिकारियों का प्रतिनिधित्व केवल 9.8 प्रतिशत था.

रिपोर्ट में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से खुलेपन को बढ़ावा देने और आपसी समझ बढ़ाने का अनुरोध किया गया है ताकि अधिकारियों को मजबूर होकर पुलिस बल से इस्तीफ़े नहीं देने पड़ें.

 
 
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