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शुक्रवार, 02 अप्रैल, 2004 को 10:04 GMT तक के समाचार
 
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पूर्व कम्युनिस्ट देश नैटो में शामिल हुए
 
नैटो का विस्तार
नैटो विस्तार के लिए ब्रसेल्स में समारोह
सात पूर्व कम्युनिस्ट देश उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानी नैटो में शामिल हो गए हैं और ब्रसेल्स में एक समारोह में उनका स्वागत किया गया.

ये देश हैं बल्गारिया, एस्तोनिया, लातविया, लिथुआनिया, रोमानिया, स्लोवाकिया और स्लोवेनिया.

ये सभी देश किसी ज़माने में कम्युनिस्ट हुआ करते थे लेकिन अब नैटो में शामिल हो गए हैं. लेकिन रूस इससे नाराज़ है.

नैटो के इस विस्तार पर रूस ने चिंता जताते हुए कहा है कि अगर उसके सुरक्षा हितों की अनदेखी की जाती है तो वह अपनी रणनीतियाँ बदलने पर विचार कर सकता है.

कार्यक्रम

ब्रसेल्स में नैटो के मुख्यालय में इन देशों के भी झंडे लहराए गए हैं और उनके राष्ट्रगीत गाए गए.

1949 में सोवियत संघ के ख़िलाफ़ पश्चिमी यूरोप की रक्षा करने के मक़सद से नैटो का गठन किया गया था और उसके बाद से यह उसका सबसे बड़ा विस्तार है.

अब नैटो की सदस्य संख्या 26 हो गई है.

इनमें एस्तोनिया, लातविया और लिथुआनिया पूर्व सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करते थे और बहुत ग़रीब रहे हैं.

और विस्तार
 हमें खुशी है कि ये नए सदस्य हमारे साथ जुड़ गए हैं – अब हमारे 26 सदस्य हो गए हैं. लेकिन नेटो के दरवाज़े अब भी खुले हैं क्योंकि कई और देश हमारी सोच और नीतियों का समर्थन करते हुए हमारे साथ जुड़ना चाहते हैं
 
नैटो के महासचिव ज़ाप दे हुप शेफ़र

नैटो के महासचिव ज़ाप दे हुप शेफ़र ने संकेत दिया कि अभी और देश नेटो में शामिल हो सकते हैं.

उन्होंने कहा, “हमें खुशी है कि ये नए सदस्य हमारे साथ जुड़ गए हैं – अब हमारे 26 सदस्य हो गए हैं. लेकिन नेटो के दरवाज़े अब भी खुले हैं क्योंकि कई और देश हमारी सोच और नीतियों का समर्थन करते हुए हमारे साथ जुड़ना चाहते हैं.”

नैटो महासचिव ज़ाप दे हुप शेफ़र ने ये भी कहा कि हालांकि पूर्व सोवियत संघ के तीन देश नेटो में शामिल हो गए हैं लेकिन रूस को इस विस्तार से चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है.

अब तक तो नॉर्वे तक ही नैटो की सेनाएँ पहुँची थीं लेकिन अब तीन और देशों में नैटो की सेना उसकी सीमाओं तक पहुँच जाएँगी.

बीबीसी के रक्षा संवाददाता जोनैथन मार्कस का कहना है कि अपने ग़ुस्से के बावजूद रूस सरकार अपने विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ को नैटो की बैठक में भेज रही है.

मजबूरी

विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ नैटो मुख्यालय में होने वाले विचार विमर्श में भाग लेने वाले हैं.

ब्रसेल्स में मौजूद बीबीसी संवाददाता जोनाथन मार्कस का कहना है कि इस विचार विमर्श में रूस के भाग लेने से यह ज़ाहिर होता है कि रूस भी यह जानता है कि वह नैटो के विस्तार को रोकने के बारे में कुछ नहीं कर सकता.

शीत युद्ध की समाप्ति के बाद नैटो ने पूर्वी यूरोप की तरफ़ अपने क़दम बढ़ाए हैं.

शीत युद्ध के दौरान पूर्वी यूरोप के ज़्यादातर देश कम्युनिस्ट हुआ करते थे और वहाँ सोवियत संघ का दबदबा था.

सोवियत संघ के विघटन के कुछ साल बाद पूर्व कम्युनिस्ट देश पोलैंड, हंगरी और चेक गणराज्य शामिल हुए थे.

 
 
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