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कोसोवो में जातीय हिंसा की निंदा
 
कोसोवो में सुरक्षाकर्मी
कोसोवो 1999 में नैटो की बमबारी के बाद से अंतरराष्ट्रीय निगरानी में है
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने कोसोवो में भड़की हिंसा की ज़ोरदार शब्दों में निंदा करते हुए सभी पक्षों से तुरंत शांति स्थापना की अपील की है.

जातीय अल्बेनियाई लोगों और सर्बों के बीच भड़की इस हिंसा में तीस लोग मारे जा चुके हैं.

सुरक्षा परिषद ने इस हिंसा को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि सभी पक्षों को शांति से काम लेना चाहिए.

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा था कि कोसोवो में अल्बेनियाई बहुल समुदाय की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि वे अपने प्रांत में सभी ख़ासतौर पर अल्पसंख्यकों के अधिकारों की हिफ़ाज़त करें.

इस बीच उत्तर अटलांटिक संधि संगठन नैटो कोसोवो में हिंसा पर क़ाबू पाने के लिए तैनात अंतरराष्ट्रीय शांति सेना में बढ़ोत्तरी के लिए एक हज़ार और सैनिक भेज रहा है.

बड़ी घटना

इसे पिछले पाँच सालों की सबसे बड़ी हिंसा की घटना बताया जा रहा है.

इस हिंसा में जातीय अल्बेनियाई लोगों ने चर्चों में आग लगा दी तो सर्बों ने कोसोवो और सर्बिया में कुछ मस्जिदों को जला डाला.

कोसोवो के प्रधानमंत्री वोयस्लाव कोस्तूनिका ने आरोप लगाया है कि यह हिंसा अल्बेनियाई लोगों की तरफ़ से किया गया एक सामूहिक हत्याकांड है.

उन्होंने कहा है कि वह प्रांत में आपातकाल की घोषणा करना चाहते हैं ताकि सर्ब समुदाय की हिफ़ाज़त की जा सके.

ग़ौरतलब है कि कोसोवो संयुक्त राष्ट्र की प्रशासनिक निगरानी में है.

अल्बेनियाई और सर्बों के बीच हिंसा की ताज़ा घटनाएँ मित्रोविका में तीन अल्बेनियाई बच्चों की मौत के बाद शुरु हुई.

इन मौतों के लिए अल्बेनियाइयों ने सर्बों को दोषी ठहराया है.

इसके बाद हिंसा बाक़ी हिस्सों में भी फैल गई.

उधर कोसोवो में सर्बों पर हुए हमलों के विरोध में बेलग्रेड में प्रदर्शन हुए हैं और कई और सर्बियाई शहरों में प्रदर्शन की योजना बनाई जा रही है.

 
 
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