BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
 
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
ग्वांतनामो बे में बंदियों को दो साल हुए
 

 
ग्वांतनामो बे शिविर में बंदी
बंदियों में कुछ किशोर अवस्था में भी हैं
 

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने क्यूबा में अमरीकी सैनिक अड्डे ग्वांतनामो बे में बंदी बनाकर रखे गए लोगों के बारे में अमरीकी सलूक की निंदा की है.

संगठन का कहना है कि अमरीका ने इन लोगों को बिना किसी आरोप के दो साल से बंदी बनाकर रखा हुआ है.

इस बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि वहाँ बंदी नौ ब्रितानी क़ैदियों का मामला कुछ ही हफ़्तों में सुलझा लिया जाएगा.

न्यूयॉर्क स्थित ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि दो साल पहले इस शिविर में लाए गए 660 लोग यह नहीं जानते कि उन्हें किन आरोपों में बंदी बनाकर रखा गया है.

"वे तो यह भी नहीं जानते कि उन्हें कभी रिहा किया जाएगा या उन पर कभी आरोप तय किए जाएंगे."

अमरीका ने इन बंदियों को "आतंकवाद के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई" में ग़ैरक़ानूनी लड़ाके घोषित किया हुआ है.

इसी दलील पर अमरीका का कहना है कि वह इन 'ग़ैरक़ानूनी बंदियों' को को जेनेवा संधि के तहत क़ैदियों को दिए गए अधिकारों के बिना ही बंदी बनाकर रख सकता है.

ह्यूमन राइट्स वॉच का आरोप है कि अमरीका इन बंदियों के साथ जो बर्ताव कर रहा है उससे अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन होता है.

संगठन ने कहा है कि आम लोग अभी तक यह नहीं जानते कि ये बंदी कौन लोग हैं और उनका क़सूर क्या है.

इन बंदियों में बहुत से किशोर अवस्था में हैं और उन्हें दो साल पहले अफ़ग़ानिस्तान पर अमरीकी नेतृत्व में हुए हमले के दौरान गिरफ़्तार किया गया था.

अमरीका कहता है कि ये लोग अल क़ायदा नेटवर्क का हिस्सा रहे हैं.

लेकिन ह्यूमन राइट्स का कहना है कि इनमें बहुत से तो सीधे-साधे नागरिक हैं और कम से कम तीन बंदी तो 15 साल से भी कम उम्र के हैं.

अमरीकी सर्वोच्च न्यायालय इस साल इस बारे में फ़ैसला देने वाला है कि क्या अमरीकी अदालतों को इन बंदियों की अपीलों पर सुनवाई का अधिकार है या नहीं.

ब्रितानी क़ैदी

इस बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि ग्वांतनामो बे में बंदी नौ ब्रितानी क़ैदियों का मामला कुछ ही हफ़्तों में सुलझा लिया जाएगा.

उन्होंने यह कहने से इंकार किया कि यदि ये लोग ब्रिटेन वापस लौटते हैं तो उन पर मुक़दमा चलाया जाएगा.

इन सभी ब्रितानी नागरिकों पर आरोप है कि उनके संबंध अल-क़ायदा या अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व शासक तालेबान से रहे हैं.

 
 
इंटरनेट लिंक्स
 
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
 
सुर्ख़ियो में
 
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
 
 
  मौसम |हम कौन हैं | हमारा पता | गोपनीयता | मदद चाहिए
 
BBC Copyright Logo ^^ वापस ऊपर चलें
 
  पहला पन्ना | भारत और पड़ोस | खेल की दुनिया | मनोरंजन एक्सप्रेस | आपकी राय | कुछ और जानिए
 
  BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>