BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
 
बुधवार, 29 अक्तूबर, 2003 को 00:14 GMT तक के समाचार
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
बाल वेश्यावृत्ति पर यूनिसेफ़ की चिंता
 
एक बाल यौनकर्मी
यूनिसेफ़ के अनुसार कई बार तो परिवारवाले ख़ुद बच्चियों को बेच देते हैं

संयुक्त राष्ट्र की बच्चों के अधिकारों के लिए काम करनेवाली संस्था यूनिसेफ़ ने जर्मनी और चेक गणराज्य की सीमा पर बाल वेश्यावृत्ति के बारे में एक रिपोर्ट जारी की है.

यूनिसेफ़ का कहना है कि वह क्षेत्र बच्चियों का यौन शोषण करनेवाले लोगों का एक प्रमुख केंद्र बन गया है.

संस्था के अनुसार उस क्षेत्र में कुछ बच्चियों को तो उनके परिवार के लोग ही बेच देते हैं.

वहाँ आठ साल तक की बच्चियों को देह व्यापार करते देखा जा सकता है और कई बार तो इसके लिए पैसे की जगह बस मिठाईयाँ दे दी जाती हैं.

 

 चेक गणराज्य बाल वेश्यावृत्ति का एक सस्ता बाज़ार बनता जा रहा है जहाँ यह अविश्वसनीय गति से बढ़ रही है

मनोवैज्ञानिक एडोल्फ़ गालवित्ज़

 

अधिकारियों का कहना है कि हज़ारों की संख्या में जर्मनी के लोग सीमा पार कर बच्चों का शोषण कर रहे हैं.

अनदेखी

जर्मनी में यूनिसेफ़ के प्रमुख का कहना है कि चेक और जर्मन सरकार इस समस्या को समाप्त करने में नाकाम रहे हैं और इसकी अनदेखी कर रहे हैं.

जर्मन पुलिस में काम करनेवाले एक मनोवैज्ञानिक एडोल्फ़ गालवित्ज़ ने इस इलाक़े को यूरोप में देह व्यापार का सबसे बड़ा अड्डा बताया है.

उन्होंने कहा,"चेक गणराज्य बाल वेश्यावृत्ति का एक सस्ता बाज़ार बनता जा रहा है जहाँ यह अविश्वसनीय गति से बढ़ रही है".

जर्मनी में यूनिसेफ़ से जुड़ी, वहाँ के राष्ट्रपति जोहानस रउ की पत्नी क्रिस्टीन रउ ने बच्चों की इस स्थिति पर गहरी चिंता प्रकट की है.


 

 कुछ जगहों पर बच्चियाँ कारों या फ़्लैटों की खिड़कियों पर इंतज़ार करती हैं. महिलाएँ बच्चियों को गोद में लेकर सौदा करती हैं और फिर उन्हें कार में ग्राहकों को थमा देती हैं

रिपोर्ट

 

उन्होंने कहा,"ये बिल्कुल चौंकानेवाली बात है कि ठीक हमारे पिछवाड़े में बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है".

बाज़ार

रिपोर्ट कहती है कि जर्मनी से लगी सीमा पर चेक गणराज्य के अलावा दूसरे मध्य और पूर्वी एशियाई देशों से बच्चियों को देह व्यापार के लिए लाया जा रहा है.

रिपोर्ट तैयार करनेवाली कैथरीन शौएर के अनुसार इस इलाक़े के बस स्टॉप, पेट्रोल पंप और होटल आदि ऐसे बाज़ार में बदल चुके हैं जहाँ बच्चियों की ख़रीदफ़रोख़्त होती है.

उन्होंने कहा,"कुछ जगहों पर बच्चियाँ कारों या फ़्लैटों की खिड़कियों पर इंतज़ार करती हैं. महिलाएँ बच्चियों को गोद में लेकर सौदा करती हैं और फिर उन्हें कार में ग्राहकों को थमा देती हैं".

शौएर के अनुसार देह व्यापार में बच्चियों के आने के पीछे भयंकर ग़रीबी प्रमुख वजह है.

इस धंधे में लगी बच्चियों को हर ग्राहक से पाँच से 25 यूरो यानी लगभग 250 से 1250 रूपए मिलते हैं.

 
 
इंटरनेट लिंक्स
 
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
 
सुर्ख़ियो में
 
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
 
 
  मौसम |हम कौन हैं | हमारा पता | गोपनीयता | मदद चाहिए
 
BBC Copyright Logo ^^ वापस ऊपर चलें
 
  पहला पन्ना | भारत और पड़ोस | खेल की दुनिया | मनोरंजन एक्सप्रेस | आपकी राय | कुछ और जानिए
 
  BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>