पुष्कर के ऊँट मेले में चलेंगे!

पुष्कर के ऊँट मेले का आयोजन 30 अक्तूबर से छह नवंबर तक.

pushkar camel fair, पुष्कर ऊँट मेला
इमेज कैप्शन, पुष्कर के मेले को पुष्कर का ऊँट मेला भी कहते हैं. ये एक सालाना जलसा है जो राजस्थान के पुष्कर शहर में आयोजित किया जाता है.
pushkar camel fair, पुष्कर ऊँट मेला
इमेज कैप्शन, शायद यह दुनिया का सबसे बड़ा ऊँट मेला भी है जहाँ मवेशियों की खरीद बिक्री की जाती है. और दुनिया भर से सैलानी पुष्कर मेला देखने आते हैं.
pushkar camel fair, पुष्कर ऊँट मेला
इमेज कैप्शन, पुष्कर झील के किनारे लगने वाले इस मेले में ऐसा भी नहीं है कि केवल ऊँटों की ही खरीद बिक्री होती है बल्कि गाय, भेड़ें और बकरियों के भी सौदे होते हैं.
pushkar camel fair, पुष्कर ऊँट मेला
इमेज कैप्शन, यहां महिलाओं के आकर्षण की चीजें भी होती हैं. तरह-तरह के जेवरात, रंग बिरंगे कपड़े और राजस्थानी लोक संस्कृति की झलक यहां देखी जा सकती है.
pushkar camel fair, पुष्कर ऊँट मेला
इमेज कैप्शन, कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष के एकादशी के दिन ऊँटों की रेस से इस मेले की शुरुआत की परंपरा रही है. इसका समापन कार्तिक पूर्णिमा के दिन होता है.
pushkar camel fair, पुष्कर ऊँट मेला
इमेज कैप्शन, अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक यह वक्त अक्तूबर-नवंबर के दरम्यां आता है. इस बरस 30 अक्तूबर से शुरू होकर यह मेला छह नवंबर तक चलेगा.
pushkar camel fair, पुष्कर ऊँट मेला
इमेज कैप्शन, यहाँ ऊँटों की नाक छिदवाने का रिवाज़ भी देखा जा सकता है. कहा जाता है कि पुष्कर में 25 हज़ार के करीब ऊँटों की खरीद बिक्री होती है और इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह मेला कितना बड़ा है. ऊँटों की रेस के अलावा रेगिस्तान के इस जहाज की फ़ैशन परेड भी यहां देखी जा सकती है.
pushkar camel fair, पुष्कर ऊँट मेला
इमेज कैप्शन, पुष्कर के ऊँट मेले में एक ऐसी प्रतियोगिता भी होती है जिसमें सबसे ज्यादा लोगों को अपनी पीठ पर बिठा सकने वाले ऊँट को विजेता घोषित किया जाता है. पुष्कर में किसी को इस बात का अंदाजा लगाने में मुश्किल नहीं होती कि राजस्थान के रेगिस्तान में कितने रंग हो सकते हैं.
pushkar camel fair, पुष्कर ऊँट मेला
इमेज कैप्शन, अजमेर से तकरीबन 11 किलोमीटर के फासले पर बसा ये शहर हिंदू धर्म के मानने वालों के लिए एक प्रमुख धार्मिक केंद्र है. इसे भारत के सबसे पुराने शहरों में भी गिना जाता है. कहते हैं कि इस शहर में मंदिरों की संख्या सैंकड़ों में है. पुष्कर ऊँट मेला इस शहर को देखने समझने के लिहाज से शायद सबसे माकूल वक्त होता है.