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क्या भारत में गर्भपता क़ानून बदल जाएगा?
पेट में पल रहे बच्चे को जन्म देना है या नहीं, इसका आख़िरी फ़ैसला कौन लेगा? मां, डॉक्टर या अदालत? भारत में अब गर्भपात का क़ानून बदल सकता है. सुप्रीम कोर्ट इस बारे में सुनवाई करेगी.
भारत में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेंग्नेंसी एक्ट के तहत गर्भधारण के 20 हफ़्ते यानी बाद गर्भपात नहीं कराया जा सकता. इस क़ानून के प्रावधानों के उल्लंघन पर सज़ा भी हो सकती है.
अगर क़ानून की शर्तें पूरी ना हों और महिला अपना भ्रूण गिरवा दे या कोई और उसका गर्भपात करवा दे तो ये अब भी जुर्म है. जिसके लिए उस औरत को ही तीन साल की सज़ा और जुर्माना हो सकता है. वहीं, गर्भवती महिला की जानकारी के बिना उसका गर्भपात करवाने पर उम्रक़ैद भी हो सकती है.
लेकिन अब इस क़ानून में संशोधन की मांग उठ रही है
रिपोर्ट: सिन्धुवासिनी
शूट/एडिट:साहिबा ख़ान
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