केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने
सोमवार को लोकसभा में कहा कि देश 'नक्सल-मुक्त'
हो चुका है.
उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य 31 मार्च तक नक्सल-मुक्त भारत का
था. पूरी प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी होने के बाद देश को सूचित किया जाएगा,
मगर मैं ऐसा बोल सकता हूं कि हम नक्सल मुक्त हो
गए हैं."
इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस पर
आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने देश में 'नक्सलवाद' ख़त्म करने के लिए कुछ नहीं किया.
अमित शाह संसद में 'देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त कराने के प्रयासों'
पर हुई बहस का जवाब दे रहे थे.
उन्होंने कहा, "मनमोहन सिंह जी ने देश के सामने स्वीकार किया था
कि कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट से भी बड़ी चुनौती देश के सामने नक्सलवाद है, लेकिन कांग्रेस ने कुछ नहीं किया."
इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया,
"देश के 12 राज्यों को रेड कॉरिडोर
बना दिया गया और वहाँ क़ानून का शासन समाप्त कर दिया गया. 12 करोड़ लोग ग़रीबी के
अंदर सालों तक जीते रहे. दोनों तरफ़ से 20 हज़ार युवा मारे गए, कई दिव्यांग बन गए. आख़िर इसके लिए कौन
ज़िम्मेदार है?"
अमित शाह ने माओवादियों के सरेंडर से जुड़ी सरकार की नीति का भी ज़िक्र किया और कहा कि 'जो हथियार डालता है, उसी से बातचीत होती है और गोली का जवाब गोली से दिया जाता है'.
उन्होंने कहा, "कुछ लोग चर्चा से नहीं मानते, उनके ख़िलाफ़ बल प्रयोग करना पड़ता है. उनके अत्याचार से निर्दोष नागरिकों को बचाना पड़ता है. इन्होंने किसानों के खेतों में बम लगाकर उन्हें अपंग बना दिया गया. बच्चों के स्कूलों में रेड कर उन्हें भर्ती किया गया. मोदी सरकार में हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है. कोई समझ जाए तो ठीक है, नहीं तो फ़ोर्स इसी दिन के लिए बनाई गई है."
केंद्रीय गृह मंत्री ने माओवादियों के सरेंडर से जुड़ी जानकारी भी दी.
उन्होंने कहा, "मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की स्टेट कमेटियों के सदस्य सरेंडर कर चुके हैं. ओडिशा में जो चार बचे थे, उनमें से एक ने सरेंडर किया और तीन मारे गए. तेलंगाना में छह ने सरेंडर किया, तीन मारे गए. अब वहाँ एक भी नहीं बचा है."
उन्होंने कहा, "इस प्रकार उनका पॉलित ब्यूरो और सेंट्रल स्ट्रक्चर लगभग समाप्त हो चुका है. हमारा लक्ष्य 31 मार्च तक नक्सल-मुक्त भारत का था. पूरी प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी होने के बाद देश को सूचित किया जाएगा, मगर मैं ऐसा बोल सकता हूं कि हम नक्सल मुक्त हो गए हैं."