लाखों क़त्लों की दास्तां सुनाने वाले पत्रकार नहीं रहे

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कंबोडिया में खमेर रूज के दौर में रिपोर्टिंग करने वाले मशहूर अमरीकी पत्रकार सिडनी शॉनबर्ग का 82 साल की आयु में निधन हो गया है.
पुलित्जर पुरस्कार विजेता शॉनबर्ग की रिपोर्टिंग से प्रेरित होकर ही ऑस्कर जीतने वाली फिल्म 'द किलिंग फील्ड्स' बनी थी.

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शॉनबर्ग ने खमेर रूज शासन की अपनी रिपोर्टिंग के लिए पत्रकारिता जगत का प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार जीता था.
खमेर रूज पार्टी ने कंबोडिया में 1975 से 1979 तक शासन किया और इस दौरान बड़े पैमाने पर लोगों की हत्याएं की गईं.

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मरने वालों की तादाद दस लाख से ज्यादा बताई जाती है जबकि कुछ अनुमान कहते हैं कि ये आंकड़ा 25 लाख के आसपास था.
1980 में शॉनबर्ग ने एक पत्रिका के लिए लिखे लेख में बताया कि कैसे खमेर रूज के दौर में लोगों का उत्पीड़न हुआ और उन्हें क़त्ल किया गया. बाद में उन्होंने एक किताब भी लिखी.
1975 में शॉनबर्ग और उनके साथी डिथ प्रान ने न्यूयॉर्क टाइम्स के अपने संपादकों के निर्देशों को अनदेखा करते हुए कंबोडिया में ही रुकने का फैसला किया था जबकि सभी पश्चिमी राजनयिक और पत्रकार वहां से भाग गए थे.
शॉनबर्ग और प्रान को खमेर रूज ने पकड़ा भी था और जान से मारने की धमकी दी थी.
डिथ प्रान की याचनाओं के कारण शॉनबर्ग की जान बची. दोनों ने फ्रांस के दूतावास में शरण ली लेकिन प्रान को वहां से ग्रामीण इलाके में भेज दिया गया.
दो हफ्ते बाद शॉनबर्ग को ट्रक से थाईलैंड भेज दिया गया जबकि डिथ प्रान भी बचकर थाईलैंड पहुंचने में कामयाब रहे और 2008 में उनका निधन हुआ था.

शॉनबर्ग की रिपोर्टिंग के आधार पर बनी 'द किलिंग फील्डस' को आठ बाफ्टा और तीन ऑस्कर पुरस्कार मिले थे.
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