मोदी-ओबामा का लेख अख़बार में छपा ही नहीं

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का साझा संपादकीय वाशिंगटन पोस्ट की वेबसाइट पर ही क्यों छपा, मुख्य अख़बार में क्यों नहीं इस पर कई लोग सवाल उठा रहे हैं.
कुछ लोगों ने तो यहां तक कहा कि संपादकीय वेबसाइट पर छपा लेकिन कोशिश ये दिखाने की थी कि वो मुख्य अख़बार में छप रहा है और अख़बार की "प्रतिष्ठा भुनाने" की कोशिश की गई.
वाशिंगटन पोस्ट अख़बार अक्सर दुनिया के बड़े-बड़े नेताओं के लेख अपने संपादकीय पन्ने पर प्रकाशित करता है. फिर क्या वजह हुई कि अमरीका के राष्ट्रपति और उसके साझेदार कहे जाने वाले देश के प्रधानमंत्री के साझा लेख को अख़बार में जगह नहीं मिली?
छपने जा चुका था अख़बार

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ये जानने के लिए जब बीबीसी ने वाशिंगटन पोस्ट अख़बार के संपादकीय पन्ने के उपसंपादक से बात की तो पता चला कि उसकी बस एक छोटी सी वजह थी, व्हाइट हाउस की तरफ़ से लेख जब तक अख़बार के दफ़्तर पहुंचा, तब तक देर हो चुकी थी और अख़बार प्रिंट के लिए जा चुका था.
उपसंपादक जैकसन डिएल का कहना था, "जब तक लेख हमारे पास पहुंचा काफ़ी देर हो चुकी थी और फिर हमने इसे वेबसाइट पर छापने का फ़ैसला किया."
उन्होंने बताया कि जब भी दुनिया के किसी बड़े नेता का लेख अख़बार के पास आता है उसे भी संपादकीय नज़रों से गुज़रना होता है और फिर उसे अख़बार में जगह मिलती है.
पिछले साल अख़बार में ईरान के राष्ट्रपति रूहानी का लेख छपा था और बेनज़ीर भुट्टो का भी वो लेख प्रकाशित हुआ था जब वो आख़िरी बार अमरीका के दौरे पर आई थीं. उस लेख में पाकिस्तानी सेना की कड़ी आलोचना की गई थी और उसकी काफ़ी चर्चा हुई थी.
प्रधानमंत्री का लेख

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अमरीका पहुंचने से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लेख वॉल स्ट्रीट जरनल में भी छपा था.
वहां भी उसे अख़बार के संपादकीय मापदंडों से गुज़रने के बाद ही प्रकाशित किया गया. वॉल स्ट्रीट जरनल की प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि उनका अख़बार कभी भी इश्तहार को ख़बर की तरह नहीं छापता है और हर लेख को ठोस संपादकीय आकलन से गुज़रना होता है.
वाशिंगटन पोस्ट वेबसाइट पर छपे अपने साझा लेख में ओबामा और मोदी ने आपसी रिश्तों में एक नया एजेंडा शुरू करने की बात की है.
उसमें कहा गया है कि ये रिश्ता जिस ऊंचाई तक जा सकता है वहां नहीं पहुंचा है और इसमें एक व्यापक साझेदारी के तहत "चलें साथ-साथ" का संदेश पेश किया गया है.
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