ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू

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ईरान के विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम के सिलसिले में किसी दीर्घकालिक समझौते तक पहुंचने के लिए ईरान और छह वैश्विक शक्तियों के बीच पहले दौर की वार्ता विएना में शुरू हो गई है.
तीन दिन तक चलने वाली ये वार्ता नवंबर के अंतरिम समझौते से आगे बढ़ेगी, जिसमें ईरान ने प्रतिबंधों में आंशिक छूट के बदले उच्च स्तरीय यूरेनियम संवर्द्धन पर नियंत्रण लगाया था.
इस वार्ता से पहले ईरान और अमरीका ने जल्द किसी समाधान की ज़्यादा उम्मीद नहीं जताई है.
पश्चिमी देशों को संदेह है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है. ईरान इससे इनकार करता रहा है.
ईरान और ब्रिटेन, अमरीका, रूस, फ्रांस, जर्मनी और चीन के बीच बातचीत मंगलवार को स्थानीय समयानुसार सुबह शुरू हुई.
पश्चिमी ताक़तें चाहती हैं कि ईरान तेज़ी से अपने संवेदनशील <link type="page"><caption> परमाणु कार्यक्रम</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/11/131124_iran_nuclear_talks_deal_sp.shtml" platform="highweb"/></link> को सीमित करे ताकि वह जल्द ही परमाणु हथियार तैयार न कर सके.
'कोई फ़ायदा नहीं होगा'
लेकिन ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और यह जारी रहेगा. वह अपने ऊपर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों की समाप्ति चाहता है, जिनकी वजह से उसकी अर्थव्यवस्था को नुक़सान पहुंचा है.
विएना में मौजूद बीबीसी संवाददाता बेथनी बेल का कहना है कि अंतिम समझौते पर वार्ता के लिए सहमति होने से पहले दोनों पक्षों के बीच कई महीने तक कड़ी सौदैबाज़ी हुई.
उनके अनुसार इस मसले के समाधान की दिशा में यह वार्ता पहला परीक्षण होगी.
सोमवार को ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई ने अपनी वेबसाइट पर जारी एक बयान में कहा कि विएना वार्ता से "कोई फ़ायदा नहीं होगा."
साथ ही उन्होंने कहा, "लेकिन हमारे अधिकारियों ने जो शुरुआत की है वह जारी रहेगी. हम अपने वादे से पीछे नहीं हटेंगे. मैं इसके ख़िलाफ़ नहीं हूँ."
इसी बीच रायटर्स समाचार एजेंसी ने अमरीकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा, "यह काफ़ी उलझी हुई, जटिल और मुश्किल प्रक्रिया है."
परमाणु कार्यक्रम के सिलसिले में दोनों पक्षों को 19 जुलाई तक किसी व्यापक समाधान तक पहुंचना है.
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