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'ये राजनेताओं का काम है'
 

 
 
परशुराम बाबूराव कांबले
परशुराम बाबूराव कांबले कहते हैं कि ये भेदभाव राजनेताओं का काम है
मुंबई में उत्तर भारतीयों के साथ मारपीट की ख़बर आम है लेकिन इस शहर में कुछ इलाक़े ऐसे भी हैं जहाँ ये दोनों समुदाय एक साथ प्यार से रहते हैं.

ऐसा ही एक इलाक़ा है जूहू और बांद्रा के बीच गजधर बाँध जहाँ न केवल उत्तर भारतीय बल्कि मराठी, दक्षिण भारतीय, मध्य प्रदेश और बंगाल के लोग भी रहते हैं और वो भी बिना किसी तनाव के.

इन्हीं झुग्गियों में पिछले 35 साल से रह रहे परशुराम बाबूराव कांबले कहते हैं, "मैं सरकारी नौकरी करता हूँ छोटी मोटी. मैं बहुत दिनों से यहीं रहता हूँ. मेरे देखते-देखते यहाँ उत्तर भारतीय लोग बसे हैं लेकिन मेरा इनके साथ अच्छा संबंध है. मैं यहाँ की समिति का अध्यक्ष भी हूं."

लेकिन फिर मुंबई में उत्तर भारतीयों को निशाना क्यों बनाया जाता है, वो कहते हैं, "ये राजनीतिज्ञों का काम है. हम तो ग़रीब लोग हैं. हमारे लिए काम ज़रुरी है इसलिए यहां अभी तक कभी भी मराठी और उत्तर भारतीयों के बीच लड़ाई नहीं हुई."

लोग यहां साथ रहते हैं लेकिन वो कहते हैं कि चुनावों में उत्तर भारतीयों का मुद्दा रहेगा और वो इसी के आधार पर मत डालेंगे.

उत्तर प्रदेश के जौनपुर से आए छागुर प्रजापति सड़क पर पान की दुकान लगाते हैं. वो कहते हैं, "देखिए जो जुल्म हमारे ऊपर होता है वो भुलाया नहीं जा सकता है. मैं तो उसी को वोट दूंगा जो हमें इस अत्याचार से बचाएगा. कम से कम यहां तो लोगों के मन में ये बात ज़रुर है."

मुंबई की सात में से कम से कम चार सीटों पर उत्तर भारतीयों का प्रभाव रह सकता है क्योंकि कई इलाक़ों में इनकी संख्या अच्छी ख़ासी है.

नेता निशाने पर

बैद्यनाथ मिश्र
बैद्यनाथ मिश्र कहते हैं कि उत्तर भारतीयों को भी मराठियों का सम्मान करना चाहिए

बिहार से आए बैद्यनाथ मिश्र कहते हैं, "आतंकी हमले का मास्टर माइंड पकड़ा जाता है लेकिन उत्तर भारतीयों पर हुए हमले का मास्टर माइंड क्यों नहीं पकड़ा जाता है. सब जानते हैं कौन ऐसा करता है. मैं राजनीति में रुचि नहीं रखता लेकिन हिंदुस्तान में रहने का हक़ मुझे है. ये हक़ कोई नहीं छीन सकता."

मिश्र यह भी मानते हैं कि अगर उत्तर भारतीय लोग मुंबई में रहते हैं तो उन्हें मराठी लोगों का सम्मान करना चाहिए और उनके साथ अच्छे संबंध रखने की कोशिश करनी चाहिए.

इसी इलाक़े में रहने वाले जगदीश हों या फिर सिकंदर सब मानते हैं कि उत्तर भारतीयों के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने का काम राजनेता करते हैं ताकि उनका वोट आधार बन सके वर्ना आम मराठियों को उत्तर भारतीयों से कोई परेशानी नहीं है.

 
 
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