उत्तराखंड में संकट में आई रावत सरकार

हरीश रावत

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उत्तराखंड में कांग्रेस की हरीश रावत सरकार पर ज़बरदस्त संकट आ गया है. वित्त विधेयक पर उसके नौ विधायकों ने सरकार के विरोध में और बीजेपी की मांग के साथ नारे लगाए.

अब हरीश रावत सरकार के सामने एकमात्र रास्ता यही है कि वह फिर से सदन में अपना बहुमत साबित करे. लेकिन इस बारे में फैसला राज्यपाल ही करेंगे.

हरीश सरकार में मंत्री हरक सिंह ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है और राज्यपाल से मुलाकात में उन्होंने सरकार को बर्खास्त करने की मांग की है. उनका कहना है कि हरीश रावत के अपने लोग सरकार में हावी हैं. हरक सिंह ने दावा किया कि नौ कांग्रेसी विधायक बीजेपी के साथ हैं.

देर शाम बीजेपी के 26 विधायक और कांग्रेस के नौ विधायक राज्यपाल से मिलने गए.

बीजेपी अध्यक्ष अजय भट्ट ने राज्यपाल से मिलकर पुलिस घोड़े को घायल करने के आरोप में गिरफ़्तार बीजेपी विधायक गणेश जोशी की हिरासत को असंवैधानिक कहा और उनकी रिहाई की मांग की.

विधानसभा अध्यक्ष ने 28 तारीख तक के लिए विधानसभा को स्थगित कर दिया.

हरीश रावत, विजय बहुगुणा

शुक्रवार देर शाम विधानसभा के भीतर ज़बरदस्त हंगामा देखा गया. बजट पास कराने की नौबत आई तो बीजेपी ने मत विभाजन के ज़रिए मतदान की मांग की.

विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी मांग को खारिज किया और ध्वनिमत से बजट पास कराने को मंजू़री दे दी, लेकिन इतना होते ही बीजेपी के विधायकों ने हंगामा कर दिया और वेल में आ गए.

अभूतपूर्व स्थिति तब आ गई जब कांग्रेस के 9 विधायक भी उनके साथ वोटिंग की मांग करते हुए वेल में आ गए.

इन नौ विधायकों हैं- हरक सिंह रावत, उमेश शर्मा काउ, सुबोध उनियाल, कुंवर प्रणव सिंह, बीजेपी नेता सतपाल महाराज की पत्नी अमृता रावत, शैलेन्द्र सिंघल, विजय बहुगुणा, शैला रानी रावत और प्रदीप बत्रा.

सदन में आज बजट पर चर्चा के दौरान 70 में से 68 विधायक मौजूद थे. बीजेपी के दो विधायक गैर हाजिर थे. इनमें से एक गणेश जोशी जेल में है और दूसरे भीम लाल आर्य अनुपस्थित रहे. वह हरीश रावत के नजदीकी माने जाते हैं.

हरीश रावत

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कांग्रेस के कुल 36 विधायक हैं. बीएसपी के दो, यूकेडी के एक और तीन निर्दलीयों का उसको समर्थन हासिल है. बीजेपी के 28 विधायक हैं जिनमें से दो मौजूद नहीं थे.

कांग्रेस को 42 विधायकों का समर्थन हासिल रहा है. लेकिन 9 चले जाते हैं तो 33 विधायक रह जाते हैं. स्पीकर को मिला दें तो कांग्रेस की सदन में संख्या 34 हो जाती है.

मौजूदा हालात में बीजेपी के शुक्रवार को मौजूद 26 विधायकों में कांग्रेस के 9 बागी विधायकों को भी शामिल कर दे तो उसका आंकड़ा 35 का हो जाता है, जो बहुमत से एक कम है. लेकिन भाजपा के दो गैरहाज़िर विधायक उसके पक्ष में वोट करते हैं तो वह स्पष्ट बहुमत में आ जाती है.

इस तरह सदन में आंकड़े को लेकर भ्रामक स्थिति बनी हुई है. और अगले कुछ रोज़ में साफ हो जाएगा कि ये ऊंट किस करवट बैठेगा.

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