बच्चों का बैंक, बच्चे ही चलाते हैं

इमेज स्रोत, Ravi Prakash

14 साल की रंजू कुमारी का ख़ुद का बैंक अकाउंट है. वह उस बैंक की असिस्टेंट चाइल्ड वॉलेंटियर मैनेजर (एसीवीएम) भी हैं.

झारखंड की राजधानी रांची के सबसे बड़े स्लम जगन्नाथपुर की रेणु उन 125 बच्चों में से एक हैं, जिनका अपना बैंक अकाउंट है.

बैंक का नाम है चिल्ड्रेन डेवेलपमेंट ख़ज़ाना अर्थात सीडीके. इसका संचालन ग़ैर-सरकारी संस्था प्रतिज्ञा के ज़िम्मे है.

60 फ़ीसदी अकाउंट लड़कियों के

सीडीके के प्रोजेक्ट मैनेजर चंदन सिंह

इमेज स्रोत, Ravi Prakash

इमेज कैप्शन, सीडीके के प्रोजेक्ट मैनेजर चंदन सिंह

सीडीके के प्रोजेक्ट मैनेजर चंदन सिंह ने बताया कि इसकी शुरुआत बच्चों के अधिकारों पर काम करने वाली दिल्ली की संस्था बटरफ़्लाईज के सहयोग से जुलाई 2014 मे की गई थी.

तब सिर्फ़ 30 बच्चों के साथ इसकी पहली शाखा खोली गई थी. अब इसकी तीन शाखाएं हैं और कुल 241 खाता धारक.

रांची में दो और खूंटी में एक शाखा चल रही है. इनमें 60 फ़ीसदी खाते लड़कियों के हैं.

बैंक का ज़िम्मा बच्चों पर

सीडीके की असिस्टेंट चाइल्ड वोलेंटियर मैनेजर रंजू (नीले टॉप में)

इमेज स्रोत, Ravi Prakash

इमेज कैप्शन, सीडीके की असिस्टेंट चाइल्ड वोलेंटियर मैनेजर रंजू (नीले टॉप में)

सीडीके की असिस्टेंट चाइल्ड वॉलेंटियर मैनेजर रंजू ने बताया कि बैंक का सारा काम बच्चे ख़ुद करते हैं.

यह सप्ताह में तीन दिन खुलता है. खाता खोलने की न्यूनतम जमा राशि एक रुपये है.

एक दिन में कोई बच्चा 200 रुपये तक जमा कर सकता है. लेकिन, 100 रुपये से ज़्यादा जमा कराने के लिए उसे अपने मां-पिता की अनुमति लानी पड़ती है.

उम्र सीमा 9 से 18 साल होनी चाहिए. सीडीके की तीनों शाखाओं की कुल जमा राशि 36 हज़ार रुपये है. यहां करंट और सेविंग दोनों ही अकाउंट खोले जाते हैं.

एडवांस की सुविधा

इमेज स्रोत, Ravi Prakash

रंजू ने बताया कि बैंक से एडवांस लेने की भी सुविधा है. इसके लिए सात बच्चों की एक कमेटी है.

यह लिखित आवेदनों पर एडवांस देने का काम करती है. यह एडवांस किसी खाता धारक की जमा राशि का 80 फ़ीसदी तक हो सकता है.

एडवांस पर किसी तरह का ब्याज नहीं लगता. जबकि बच्चों को जमा राशि पर 10 फ़ीसदी सालाना ब्याज दिया जाता है.

स्लम के हैं खाता धारक

प्रतिज्ञा के अध्यक्ष अजय कुमार बच्चों को ट्रेनिंग देते हुए.

इमेज स्रोत, Ravi Prakash

इमेज कैप्शन, प्रतिज्ञा के अध्यक्ष अजय कुमार बच्चों को ट्रेनिंग देते हुए.

सीडीके की संचालक संस्था प्रतिज्ञा के अध्यक्ष अजय कुमार ने बीबीसी को बताया कि ज़्यादातर बच्चे स्लम के हैं.

ज़ाहिर है ये पढ़ाई के साथ-साथ छोटा-मोटा काम भी करते हैं. कोई सब्ज़ी बेचता है तो कोई घरों में झाड़ू-पोछा.

उन्होंने बताया कि इन बच्चों को ट्रेनिंग देकर बैंकिंग के तौर-तरीक़े समझाए गए हैं.

प्रतिज्ञा इनके काम-काज पर नज़र रखती है. बच्चे अब इस बैंक के ब्रांड अंबेसडर बन चुके हैं. उम्मीद है कि इनके खाता धारकों की संख्या और बढ़ेगी.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> करें. <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>