चंदा जुटा फ़िल्म बनाने में जुटे आदिवासी

सोनचांद

इमेज स्रोत, bir buru ompay media and rntertainment llp production

झारखंड के कुछ उत्साही आदिवासी चंदे के धन से एक फ़िल्म बना रहे हैं. फ़िल्म का नाम है 'सोनचांद'.

उनका कहना है कि भारतीय सिनेमा के 100 साल में आदिवासी कहीं नहीं हैं. लेकिन अब वह हाशिये पर रहने वाले नहीं.

उनके मुताबिक़, "हमें अभिव्यक्ति के सबसे सशक्त इस माध्यम में अपनी जगह बनानी है. इस फ़िल्म के सभी कलाकार आदिवासी हैं. डायरेक्टर और प्रोड्यूसर भी."

'सोनचांद' की प्रोड्यूसर वंदना टेटे ने बीबीसी को बताया कि चंदे की रकम से बनाई जा रही यह फ़ीचर फ़िल्म एक सामुदायिक फ़िल्म है.

वो बताती हैं, "इसके लिए किसी कलाकार या तकनीशियन ने कोई पैसा नहीं लिया है. रांची के पास अड़की के गुनतुरा गाँव में इसकी अधिकतर शूटिंग हुई है."

सोनबारी से 'सोनचांद'

फ़िल्म सोनचांद

इमेज स्रोत, RAVI PRAKASH

इमेज कैप्शन, फ़िल्म सोनचांद की हिरोइन माकी नाग.

"यह आदिवासियों के भगवान बिरसा मुंडा के गाँव उलिहातु का पड़ोसी गाँव है. शूटिंग रांची में जारी है."

उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान कलाकारों के खाने का प्रबंध भी गाँव वाले ही कर रहे हैं. यह सामुदायिक भावना और लोगों से चंदा जुटाकर बनने वाली देश की पहली फ़िल्म होगी.

फ़िल्म के लेखक अश्विनी कुमार पंकज बताते हैं कि 'सोनचांद' की कहानी छत्तीसगढ़ की सोनबारी से प्रेरित है.

बकौल पंकज, सोनबारी बस्तर के बकावंड प्रखंड के आश्रम स्कूल की छात्रा थीं. उनका पैर काट दिया गया था.

पंकज ने बताया कि सिनेमा में आदिवासी हस्तक्षेप के लिए उन दिनों वे कहानी की तलाश कर रहे थे. तभी यह घटना किसी अखबार में सिंगल कालम में छपी मिली.

सोनचांद

इमेज स्रोत, RAVI PRAKASH

'सोनचांद' की प्रेरणा उन्हें यहीं से मिली. पंकज यह साफ करते हैं कि सोनबारी ने सिर्फ़ प्रेरणा का काम किया. 'सोनचांद' अलग कहानी है.

बिर बुरु ओम्पाय मीडिया एंड एंटरटेनमेंट की पहली फ़िल्म है 'सोनचांद'.

बिर का मतलब जंगल और बुरु का मतलब पहाड़ होता है.

झारखंड के आदिवासी मुंडारी, हो, खड़िया और संथाली भाषाएं बोलते हैं.

लिहाज़ा, फ़िल्म निर्माण कंपनी के नामाकरण के वक्त भी जंगल और पहाड़ जैसे शब्दों पर ज़ोर दिया गया.

मास ऑडिशन

अड़की के गाँव में मास ऑडिशन के लिए लोगों को समझा गया तब जाकर लोग तैयार हुए.

इमेज स्रोत, RAVI PRAKASH

इमेज कैप्शन, अड़की के गाँव में मास ऑडिशन के लिए लोगों को समझा गया तब जाकर लोग तैयार हुए.

वंदना टेटे कहती हैं कि यह आम फ़िल्मों की तरह एक हीरो या हीरोइन वाली नहीं है. यह मल्टी स्टारर फ़िल्म है. इसका हर कलाकार अहम है.

'सोनचांद' की भूमिका निभा रहीं 14 वर्षीया माकी नाग ने बताया कि वह प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय अड़की मे पढ़ती हैं.

इस फ़िल्म के डायरेक्टर रंजीत उरांव, एके पंकज, मनोज मखीजा और विजय गुप्ता (अब स्वर्गीय) ने उनके स्कूल में आकर ऑडिशन लिया.

माकी नाग कहती हैं, "इसमें मेरे स्कूल की पांच लड़कियां चुनी गईं. फ़ेसबुक पर सबकी तस्वीरों के साथ वोटिंग हुई. मुझे सबसे ज़्यादा वोट मिले. अब मैं इस फ़िल्म की हीरोइन हूँ."

क्या बनना चाहती हैं, पूछने पर वो कहती हैं, "हीरोइन बनूंगी भइया."

माकी नाग उत्साह से लबरेज आदिवासी किशोरी हैं. 'सोनचांद' में करीब 150 लोग अभिनय कर रहे हैं.

पंकज बताते हैं कि पूरा गाँव ही एक्टिंग कर रहा है.

रिलीज़

वंदना टेटे

इमेज स्रोत, RAVI PRAKASH

इमेज कैप्शन, फ़िल्म निर्माता वंदना टेटे

'सोनचांद' को 2016 के सरहुल पर रिलीज़ करने की योजना है.

झारखंड के जाने-माने फ़िल्मकार मेघनाथ कहते हैं कि 'सोनचांद' अद्भुत प्रयास है. यह पूरे आदिवासी समाज की कहानी है.

मेघनाथ ने बीबीसी को बताया कि केरल में सालों पहले एक फ़िल्म बनी थी 'अम्मा अरियन.'

हिन्दी मे इसका अर्थ है 'मां को चिट्ठी.' इसे जॉन अब्रहाम ने बनाया था.

'अम्मा अरियन' भी सामाजिक सहयोग से बनी थी.

मेघनाथ के अनुसार, इसके अलावा इस तरह से फ़िल्म बनाने का कोई दूसरा उदाहरण नहीं है.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>