व्यापमंः कौन हैं राम प्रकाश अग्रवाल?

इमेज स्रोत, PTI
मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले की जाँच सीबीआई की सौंपी गई है, जिसका नेतृत्व कर रहे हैं सीबीआई के एंटी करप्शन विंग के संयुक्त निदेशक राम प्रकाश अग्रवाल.
पुलिस महकमे में वो आरपी अग्रवाल के रूप में जाने जाते हैं. 55 वर्षीय अग्रवाल असम-मेघालय कॉडर के 1986 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं.
उनके काम करने का तरीका कुछ ऐसा है कि सीबीआई ने 5 मई, 2015 को एक ऑफ़िस ऑर्डर जारी कर अग्रवाल के कार्यकाल को 27 जनवरी 2016 तक बढ़ा दिया है.
ऐसे में उनके पास व्यापमं घोटाले की जांच के लिए क़रीब 6 महीने का ही समय होगा.
भंवरी देवी कांड से मिली चर्चा

इमेज स्रोत, VIPUL GUPTA
राजस्थान के भंवरी देवी कांड की शुरुआती जाँच के दौरान चर्चा में आए अग्रवाल को जटिल मामलों की तह तक जाकर छानबीन करने का गहरा अनुभव है.
अग्रवाल सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले की जांच का दायित्व भी उठा चुके हैं.
यही वजह बताई जाती है कि पुलिस सर्विस के अधिकतर समय में वे केंद्रीय डेपुटेशन पर ही रहे हैं.
राष्ट्रपति पुलिस मेडल से 2010 में सम्मानित अग्रवाल, जनवरी, 2010 के बाद से सीबीआई में कार्यरत है.
मेघालय में भी उनके काम की काफी प्रशंसा होती है. उनके साथ काम करने वाले पुलिस अधिकारियों के बीच उनकी काफ़ी दबदबा है.
इसका पता इस बात से भी चलता है कि मेघालय के आईजीपी (कानून-व्यवस्था) जीएचपी राजू ने बिना अग्रवाल की अनुमति के उनका जॉब प्रोफ़ाइल देने से इनकार कर दिया.

इमेज स्रोत, PTI
बीबीसी हिंदी से बातचीत में राजू ने कहा कि उनके पास अग्रवाल की जॉब प्रोफाइल संबंधी फाइल तो है लेकिन वह बिना उनकी अनुमति के ये जानकारी नहीं दे सकते.
बड़ी चुनौती
राम प्रकाश अग्रवाल पुलिस सेवा में ज्यादातर समय आपराधिक मामलों की जांच से ही जुड़े रहें. मेघालय में भी वे अपराध जांच विभाग (सीआईडी) में बतौर आईजीपी काफी दिनों तक रहे.
इसी अनुभव की बदौलत उन्हें आगे चलकर देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई में काम करने का मौका मिला. सीबीआई में उन्होंने देश के कई चर्चित मामलों की जांच की जिम्मेवारी संभाली.
बीई (मैकेनिकल) की पढ़ाई के बाद पुलिस सेवा में आए अग्रवाल के सामने व्यापमं घोटाले की जांच एक बड़ी चुनौती है.

इमेज स्रोत,
ऐसे आरोप हैं कि अब तक इस मामले में जांच ठोस तरीके से आगे नहीं बढ़ी है.
जाँच
देश में अपने तरीके का यह शायद पहला मामला है जिसमें जांच के दौरान मामले से किसी न किसी प्रकार जुड़े इतने लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है.
एक के बाद एक मौत से पूरा मामला रहस्यमय बन गया है.
ऐसे में इतने बड़े घोटाले में पैसे के लेन-देन से लेकर राजनेताओं, नौकरशाहों, शिक्षकों और छात्रों के खिलाफ छानबीन के लिए सीबीआई ने अग्रवाल को 40 सदस्यों की टीम दी है.

इमेज स्रोत, VIPUL GUPTA
कांग्रेस इस घोटाले को 2जी से भी बड़ा घोटाला बता रही है. लिहाजा वह जांच को लेकर खासकर केंद्र सरकार की गतिविधियों पर लगातार नज़र रखेगी.
केंद्र और मध्य प्रदेश राज्य दोनों जगहों पर भाजपा की सरकार है. ऐसे में जाँच पर राजनीतिक दबाव के भी सवाल उठें तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां <link type="page"><caption> क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>

































