भूस्खलन: 'बिखरे शवों से अब भी विचलित हूं'

अमित राक्षे

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पुणे ज़िले के मालीण गांव में आई प्राकृतिक आपदा की ख़बर सबसे पहले वहां से 20-25 किलोमीटर दूर स्थित घोडेगांव के लोगों को मिली थी.

वहां के सरकारी डॉक्टर अपने साथियों के साथ मालीण गांव पहुँचे. उनकी इस टीम में अमित राक्षे भी शामिल थे.

राक्षे बताते हैं कि उन्होंने गुरुवार शाम सात-आठ शव निकालने में राहतकर्मियों की मदद की.

क्षत-विक्षत शवों की देखने के बाद वो अब भी विचलित हैं.

मालीण गांव में हुए सामूहिक अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां लाने वालों में अमित भी शामिल थे.

ट्रक में लकड़ियों के ढेर पर बैठे अमित ने बताया, "मैं डिंभे गांव में रहता हूं और मालीण गांव अकसर आना-जाना होता था. मेरे यहां कुछ दोस्त हैं. लेकिन वे सभी सुरक्षित हैं.''

मालिन गांव में जमा लोग.

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उन्होंने बताया, ''जब कल सुबह हम यहां पहुंचे, तब केवल घो़ड़ेगांव के पुलिस के कर्मचारी ही वहां पहुंचे थे. जब हम गांव पहुंचे उस समय भी मलबा और पानी बहकर आ रहा था."

गीली लकड़ियां

उन्होंने बताया कि मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए वो मनचर से लकड़ियां ला रहे हैं. ये लकड़ियां गीली हैं. लेकिन अब दूसरा कोई चारा नहीं है.

मालीन गांव में अपने परिजनों को खोने के बाद रोती एक महिला.

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मनचर के एक कॉलेज से स्नातक अमित कहते हैं कि मलबे में फंसे शवों को ढूंढ पाना नामुमकिन है.

उन्होंने बताया, "एक मां और बच्ची का शव मैंने बिल्कुल नदी के किनारे से निकाला है. क्या पता कितने शव पहाड़ी की ढलान से बहते हुए पानी के साथ नदी में बह गए हों."

मलबे से निकाले गए शवों का पोस्टमार्टम पांच किमी दूर अडिवरे गांव के प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में किया गया.

नदी में शवों की तलाश करते एनडीआरएफ़ के सदस्य.

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ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से 18 लोगों का सामूहिक अंतिम संस्कार किया.

ख़राब मौसम बाधा

पुणे में काम कर रही राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन राहत बल टीम के प्रमुख आलोक अवस्थी ने बताया कि राहत कार्य अगले एक हफ़्ते तक जारी रह सकता है.

उनका कहना था कि अगर बारिश रुक जाए और मौसम साथ दे, तो दो-तीन दिन में राहत कार्य पूरा कर लिया जाएगा.

महाराष्ट्र सरकार ने इस प्राकृतिक आपदा के शिकार लोगों के लिए दो लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की है.

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