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ममता बनर्जी ने कहा, बीजेपी को देश से खदेड़ने तक 'खेला' होगा
- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से बीबीसी हिंदी के लिए
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने बुधवार को बीजेपी हटाओ देश बचाओ का नारा देते हुए तमाम विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील की.
विधानसभा चुनाव के बाद अपनी पहली रैली में उन्होंने कोविड प्रबंधन में केंद्र की कथित नाकामी, तेल और गैस की बढ़ती क़ीमतों और पेगासस के ज़रिए फ़ोन टैप करने जैसे मुद्दों पर भी बीजेपी को तानाशाह और कोरोना से भी ख़तरनाक वायरस कहा.
पेगासस के ज़रिए तमाम नेताओं, जजों और पत्रकारों के फोन टैप करने का ज़िक्र करते हुए टीएमसी प्रमुख ने सुप्रीम कोर्ट के जजों से इस मामले पर ख़ुद संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज करने या फिर इसकी जाँच के लिए एसआईटी गठित करने की अपील की. टीएमसी प्रमुख ने कहा कि न्यायपालिका ही लोकतंत्र को बचा सकती है.
ममता ने कहा, "देश को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होना होगा. ऐसा नहीं हुआ तो लोग हमें माफ़ नहीं करेंगे."
ममता बुधवार को यहाँ कालीघाट स्थित अपने आवास के सामने बने मंच से सालाना शहीद रैली को वर्चुअल तरीक़े से संबोधित कर रही थीं. इस साल ख़ास बात यह रही कि पहली बार ममता ने अपना ज़्यादातर भाषण हिंदी और अंग्रेज़ी में दिया. बीच-बीच में वे बांग्ला भी बोलती रहीं. अमूमन पहले वे ज़्यादातर भाषण बांग्ला में ही देती थीं.
पहली बार बंगाल से बाहर निकलने के क़वायद के तहत टीएमसी ने उनकी इस रैली का दिल्ली, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश के अलावा गुजरात तक प्रसारण किया. कोलकाता में उनकी रैली में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर मौजूद थे, जबकि दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एनसीपी नेता शरद पवार, कांग्रेस के पी चिदंबरम और सपा के रामगोपाल यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने उनका भाषण सुना.
ममता ने कहा, "मैं नहीं जानती 2024 में क्या होगा. लेकिन इसके लिए अभी से तैयारियाँ करनी होंगी. हम जितना समय नष्ट करेंगे, उतनी ही देरी होगी. बीजेपी के ख़िलाफ़ तमाम दलों को मिल कर एक मोर्चा बनाना होगा."
उन्होंने शरद पवार और चिदंबरम से अपील की कि वे 27 से 29 जुलाई के बीच दिल्ली में इस मुद्दे पर बैठक बुलाएँ. ख़ुद ममता भी उस दौरान दिल्ली के दौरे पर रहेंगी. ममता का कहना था कि देश और इसके लोगों के साथ ही संघवाद के ढांचे को बचाने के लिए हमें एकजुट होना होगा.
टीएमसी नेता ने कहा, "बीजेपी को देश से खदेड़े बिना लोकतंत्र को बचाना मुश्किल होगा. जब तक ऐसा नहीं होता हर राज्य में खेला होगा. हमने बंगाल में एक बार खेला दिखा दिया है. अब फिर भगवा पार्टी को खेला दिखाएँगे."
ममता ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने देश की आज़ादी को ख़तरे में डाल दिया है और लोकतंत्र के तमाम स्तंभों का गला घोंट दिया है.
उनका कहना था कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जब हज़ारों लोगों की मौत हो रही थी, तब प्रधानमंत्री समेत पूरी केंद्र सरकार बंगाल चुनाव जीतने के लिए डेली पैसेंजर बन गई थी. लेकिन राज्य के लोगों ने उन्हें माकूल जवाब दे दिया.
केंद्र पर कोरोना से निपटने में पूरी तरह नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए ममता ने कहा कि सरकार ज़रूरी दवाएँ, वैक्सीन और ऑक्सीजन मुहैया नहीं करा सकी. नतीजतन चार लाख लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा.
उन्होंने उत्तर प्रदेश की सराहना के लिए भी प्रधानमंत्री की आलोचना की और कहा कि उनको ऐसा करते हुए शर्म आनी चाहिए थी. उत्तर प्रदेश से शव गंगा में बह कर कभी बिहार पहुँचते रहे तो कभी बंगाल.
'पेगासस सबसे बड़ा स्कैंडल'
पेगासस मामले का ज़िक्र करते हुए उन्होंने इस अब तक का सबसे बड़ा स्कैंडल बताया. उन्होंने अपना फ़ोन दिखाते हुए कहा- मैंने अपना फ़ोन प्लास्टर कर दिया है. इसी तरह दिल्ली की सत्ता से बीजेपी को भी प्लास्टर लगा कर बाहर करना होगा.
उनका कहना था, "फ़ोन टैपिंग की बात मुझे पहले से मालूम थी. इसी डर से मैं चाह कर भी पवार, चिदंबरम, केजरीवाल या नवीन पटनायक जैसे नेताओं से फ़ोन पर बात नहीं कर पाती थी. बीजेपी ने चुनाव के दौरान अभिषेक और पीके के साथ हुई मेरी बैठक की बातें भी रिकॉर्ड कर ली थी. बीजेपी को अपने मंत्रियों पर भी भरोसा नहीं है."
इस सिलसिले में ममता ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का भी ज़िक्र किया.
प्रधानमंत्री मोदी पर बरसते हुए ममता ने कहा कि वे उनकी निजी आलोचक नहीं हैं. राजनीति में शिष्टाचार लाजिमी है. लेकिन बंगाल की सत्ता हासिल करने के लिए इतना नीचे गिरने के बावजूद उनको कुछ हासिल नहीं हुआ. पूरी दुनिया की निगाहें बंगाल चुनाव पर टिकी थीं. लेकिन लोगों ने उनको ठुकरा दिया.
टीएमसी नेता का कहना था कि मन की बात से अगर आम लोगों को कोई फ़ायदा नहीं हो, तो सिर्फ ज्ञान देने के लिए ऐसा नहीं करना चाहिए.
उनका आरोप था कि सरकार ग़रीबों के हित और विकास पर ख़र्च करने की बजाय जासूसी पर मोटी रकम ख़र्च कर रही है. सरकार के पास कोरोना की संभावित तीसरी लहर को रोकने की भी कोई योजना नहीं है. राज्यों को ज़रूरत के मुक़ाबले दवाओं और वैक्सीन की सप्लाई नहीं की जा रही है. ममता ने बीजेपी पर धमकी की राजनीति करने और चुनाव जीतने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का बेजा इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया.
क्यों मनता है शहीद दिवस?
आख़िर ममता बनर्जी हर साल शहीद दिवस क्यों मनाती हैं? इस बारे में जानने के लिए 28 साल पीछे लौटना होगा. वर्ष 1993 में ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में युवा कांग्रेस की अध्यक्ष थीं.
उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए सचित्र वोटर कार्ड की मांग की थी. इस मांग के समर्थन में युवा कांग्रेस ने राइटर्स (सचिवालय) चलो अभियान की अपील की थी. लेकिन इस जुलूस के धर्मतल्ला इलाक़े में पहुँचते ही पुलिस ने फ़ायरिंग शुरू कर दी. इससे 13 युवकों की मौक़े पर ही मौत हो गई थी.
उसके बाद बंगाल की राजनीति में उथल-पुथल मच गई थी. उसके बाद ममता हर साल 21 जुलाई को उन 13 युवकों की याद में शहीद दिवस मनाती रही हैं.
कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस पार्टी (टीएमसी) के गठन के बाद भी पार्टी 21 जुलाई के दिन को नहीं भूली. बीते साल कोरोना की वजह से इसे सांकेतिक मनाया गया था. लेकिन मिशन 2024 के तहत इस बार ममता ने वर्चुअल तरीक़े से ही इसे बड़े पैमाने पर मनाने की तैयारी की थी.
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