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नीतीश, सुशील और तेजस्वी: 'दाग' सब पर हैं
- Author, विभुराज
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
बिहार में चल रही राजनीतिक उठा-पटक के बीच आरोप-प्रत्यारोपों की झड़ी लगी हुई है.
नीतीश के इस्तीफ़े के बाद आरजेडी प्रमुख लालू यादव ने नीतीश कुमार पर हत्या के मामले में अभियुक्त होने का आरोप लगाया.
जेडीयू खेमे और भाजपा ने तेजस्वी यादव पर आर्थिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए.
पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर बिहार विधानसभा में लंबे समय तक नेता प्रतिपक्ष रहे और मौजूदा उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सबसे ज़्यादा मुखर दिखे.
आइए देखते हैं कि नीतीश कुमार, सुशील कुमार मोदी और तेजस्वी यादव के चुनावी हलफ़नामे खुद उन पर चल रहे मामलों के बारे में क्या कहते हैं.
नीतीश कुमार
2012 के बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए नीतीश ने जो हलफ़नामा दायर किया था, उसमें बाढ़ के पंडारक पुलिस थान में दर्ज एक मामले का ज़िक्र खुद उन्होंने किया है.
1991 के एक मर्डर केस के सिलसिले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 147, 148, 149 (बलवा), 302 (हत्या) और 307 (हत्या की कोशिश) के तहत मामला दर्ज है.
साल 2009 में बाढ़ की एक अदालत ने इस मामले में संज्ञान लेने का आदेश दिया था. निचली अदालत के इस आदेश के ख़िलाफ़ नीतीश कुमार ने पटना हाई कोर्ट में अपील दायर कर रखी है.
मामले पर सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट ने 8 सितंबर, 2009 के फैसले में बाढ़ कोर्ट में आगे की सुनवाई पर रोक लगा दी थी. मामला पटना हाई कोर्ट में अभी लंबित है.
सुशील कुमार मोदी
नीतीश कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री पद पर तेजस्वी यादव की जगह लेने वाले सुशील कुमार मोदी पर भी कुछ मामले दर्ज हैं.
साल 2012 के बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए सुशील कुमार मोदी की तरफ से दायर किए गए हलफ़नामे में भी उन पर दर्ज मामलों का ज़िक्र है.
हलफ़नामे के मुताबिक भागलपुर ज़िले के नौगछिया कोर्ट में उन पर आईपीसी की 500, 501, 502 (मानहानि), 504 (शांति भंग) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत केस दर्ज है.
सुशील कुमार मोदी के ख़िलाफ़ ये मामला आरजेडी नेता डॉक्टर आरके राणा ने दर्ज कराया था. राणा को बाद में चारा घोटाले के एक मामले में दोषी करार दिया गया था.
1999 के इस मामले को ख़त्म कराने के लिए पटना हाई कोर्ट में दायर की गई अपील पर सुशील कुमार मोदी को स्टे ऑर्डर मिला हुआ है. मामाला पटना हाई कोर्ट में अभी भी लंबित है.
तेजस्वी यादव
तेजस्वी यादव 2015 में पहली बार विधायक बने.
चुनाव आयोग के समक्ष दायर किए गए उनके ही हलफ़नामे के मुताबिक उन पर पटना के कोतलावी थाने में आईपीसी की धारा 147, 149 (दंगा), 341 (गलत तरीके से किसी को रोकना), 323 (मार-पीट करने), 332 (सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी में बाधा डालना), 431 (सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना), 504 (शांति भंग), 506 (धमकाने), 353 (सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी में बलपूर्वक बाधा डालना) और 114 (अपराध के लिए उकसाना) के तहत मामले दर्ज हैं.
7 जुलाई को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने बताया कि आईआरसीटी के एक मामले में तेजस्वी यादव के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 120B (आपराधिक साजिश) और 420 (धोखाधड़ी और बेईमानी से प्रॉपर्टी हड़पना) के तहत मामला दर्ज किया गया है.
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