BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
 
शनिवार, 17 जनवरी, 2004 को 04:46 GMT तक के समाचार
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
खाड़ी के प्रवासी भारतीयों की कई हैं मुश्किलें
 

 
डॉक्टर पी मोहम्मद अली
डॉक्टर पी मोहम्मद अली को इस साल प्रवासी भारतीय सम्मान दिया गया
 

खाड़ी के देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों की देश से सौतेले बर्ताव की शिकायत यूँ ही नहीं है. उनका कहना है कि जहाज़ के किराए का मसला हो या हवाई अड्डे पर जाँच का हर जगह उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है.

एक अनुमान के अनुसार खाड़ी देशों में रह रहे लगभग 35 लाख भारतीयों में से ज़्यादातर की आमदनी 300 डॉलर प्रति माह से अधिक नहीं है. इसके बावजूद यहाँ से भारत की उड़ान का किराया सबसे अधिक किरायों में से एक है.

पिछले दिनों दिल्ली में हुए प्रवासी भारतीय दिवस में शामिल होकर लौटे ओमान के जाने-माने व्यापारी डॉक्टर पी मोहम्मद अली इन नागरिकों की भावनाओं को आवाज़ देते हुए कहते हैं, "ऐसा क्यों है कि कोलंबो होते हुए केरल जाना और कराची होते हुए मुंबई जाना ज़्यादा सस्ता है जबकि एयर इंडिया की सीधी उड़ानें कहीं महँगी हैं."

उल्लेखनीय है कि डॉक्टर मोहम्मद अली को इस बार के प्रवासी दिवस में प्रवासी भारतीय पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है.

उन्हें इस सम्मेलन में खाड़ी के नागरिकों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिए जाने का मलाल तो है ही. वह कहते हैं, "सरकार ने हमें बजट एयरलाइंस और शिपंग सेवा आरंभ करने के बारे में कोई आश्वासन नहीं दिया."

राम बक्सानी
 

 प्रवासी भारतीयों के बारे में फ़ैसले वे लोग ले रहे हैं जिन्हें उनके बारे में कुछ पता ही नहीं है

राम बक्सानी

 

इतनी ही नहीं खाड़ी के देशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों की माँग ये भी है कि उन्हें चुनाव में हिस्सेदारी मिले और संसद में प्रवासी भारतीयों का भी प्रतिनिधित्व हो. मगर इन माँगों पर भी ध्यान नहीं दिया गया.

इसी तरह दुबई के जाने-माने प्रवासी भारतीय राम बक्सानी की भी कुछ शिकायतें रहीं. कार्यक्रम में हिस्सा लेकर लौटे बक्सानी ने कहा कि प्रवासी भारतीयों के बारे में फ़ैसले वे लोग ले रहे हैं जिन्हें उनके बारे में कुछ पता ही नहीं है.

डॉक्टर अली के अनुसार, "छोटे से छोटा श्रमिक देश के लिए एक आर्थिक सिपाही जैसा होता है और उसके हितों की रक्षा होनी चाहिए. फिर चाहे वो देश में हो या देश से बाहर."

दरअसल खाड़ी के देशों में रह रहे प्रवासियों को वहाँ की नागरिकता नहीं मिलती इसलिए उन्हें कभी न कभी लौटकर आना ही होता है. इसलिए इन लोगों की माँग है कि देश को इन्हें ख़ुद से अलग नहीं समझना चाहिए.


किराए के अलावा डॉक्टर अली कहते हैं कि कई स्तरों पर खाड़ी के देशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों का शोषण होता है.

वह कहते हैं, "खाड़ी देश के प्रवासी के साथ उसके यहाँ आने से पहले ही शोषण शुरू हो जाता है. सब उससे पैसा ऐंठना चाहते हैं. यहाँ तक कि जब वो अपने देश लौटता है तब भी हवाई अड्डे पर उतरने से लेकर वापसी तक लोग उसके पीछे लगे रहते हैं."

 
 
 
नाम
आपका पता
किस देश में रहते हैं
ई-मेल पता
टेलीफ़ोन नंबर*
* आप चाहें तो जवाब न दें
क्या कहना चाहते हैं
 
  
 
आपकी राय के लिए धन्यवाद. हम इसे अपनी वेबसाइट पर इस्तेमाल करने की पूरी कोशिश करेंगे, लेकिन कुछ परिस्थितियों में शायद ऐसा संभव न हो. ये भी हो सकता है कि हम आपकी राय का कुछ हिस्सा ही इस्तेमाल कर पाएँ.
 
इससे जुड़ी ख़बरें
 
 
इंटरनेट लिंक्स
 
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
 
सुर्ख़ियो में
 
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
 
 
  मौसम |हम कौन हैं | हमारा पता | गोपनीयता | मदद चाहिए
 
BBC Copyright Logo ^^ वापस ऊपर चलें
 
  पहला पन्ना | भारत और पड़ोस | खेल की दुनिया | मनोरंजन एक्सप्रेस | आपकी राय | कुछ और जानिए
 
  BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>