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बुधवार, 26 सितंबर, 2007 को 16:06 GMT तक के समाचार
 
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'मेरा जीवन एक फ़िल्म की तरह है'
 
देव आनंद ने आत्मकथा में छह दशकों के सफ़र पर खुलकर लिखा है
26 सितंबर 2007. दो ऐसे लोगों का जन्मदिन जिनमें से एक राजनीति के शिखर पर पहुँचा है तो दूसरा वर्षों से हिंदी सिनेमा का सदाबहार नायक रहा है.

इन दोनों व्यक्तियों ने अपना-अपना जन्मदिन एक साथ मनाने फ़ैसला किया.

दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और देव आनंद का जन्मदिन एक ख़ास अंदाज़ में मनाया गया, प्रधानमंत्री ने देव आनंद की आत्मकथा 'रोमैंसिंग विद लाइफ़' का विमोचन किया.

यह मनमोहन सिंह का 75वां और देव आनंद का 84वां जन्मदिन था.

इस मौक़े पर दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देव आनंद की खुलकर प्रशंसा की, उन्होंने कहा, "देव साहब 84 वर्ष की उम्र में भी सिर्फ़ दिल से जवान नहीं हैं बल्कि उन्हें देखकर भी जवानी का एहसास होता है, देश के लाखों-लाख प्रशंसकों के साथ मैं भी उन्हें सुदीर्घ, स्वस्थ और रचनात्मक जीवन की शुभकामना देता हूँ".

 देव साहब 84 वर्ष की उम्र में भी सिर्फ़ दिल से जवान नहीं हैं बल्कि उन्हें देखकर भी जवानी का एहसास होता है, देश के लाखों-लाख प्रशंसकों के साथ मैं भी उन्हें सुदीर्घ, स्वस्थ और रचनात्मक जीवन की शुभकामना देता हूँ
 
मनमोहन सिंह

बीबीसी हिंदी पत्रिका के अतिथि संपादक रह चुके देव आनंद ने अपनी किताब के बारे में कहा, "यह मेरी आत्मकथा है, मेरा जीवन भी एक बड़ी एपिक फ़िल्म की तरह रहा है, मैं 84 साल का हूँ और 62 वर्षों से सिनेमा से जुड़ा रहा हूँ, उसी की कहानी सुनाने की कोशिश की है इस किताब में."

उन्होंने कहा, "मुझे जीवन से प्यार है, अपने काम से प्यार है इसलिए मैंने किताब का नाम रखा है रोमैंसिंग विद लाइफ़."

किताब का नाम प्रधानमंत्री को भी पसंद आया, उन्होंने कहा, "देव आनंद जी पिछली आधी सदी के सबसे रोमांटिक नायकों में से एक हैं इसलिए उनकी किताब का नाम बिल्कुल सही है रोमैंसिंग विद लाइफ़."

आत्मकथा

देव आनंद की आत्मकथा का प्रकाशन पेंगुइन बुक्स ने किया है और कहा जा रहा है कि यह संभवतः किसी भी भारतीय फ़िल्मी हस्ती की पहली विस्तृत आत्मकथा है.

जानकारों का कहना है कि इस किताब में काफ़ी कुछ पढ़ने को है, 1930 के दशक में देव आनंद का लाहौर और गुरदासपुर में बीता बचपन, 1940 के दशक में मुंबई में संघर्ष, सुरैया से उनका प्रेम प्रसंग, भाइयों के साथ उनके रिश्ते वग़ैरह.

रोमैंसिंग विद लाइफ़ में उन्होंने अपने साथी कलाकारों दिलीप कुमार और राज कपूर को भी बहुत स्थान दिया है. त्रिमूर्ति कहे जाने वाले इन तीनों कलाकारों के बीच काफ़ी घनिष्ठ संबंध रहे हैं.

इस किताब को कुछ लोग हिंदी सिनेमा का छह दशकों का एक दिलचस्प दस्तावेज़ मान रहे हैं.

 
 
देवानंदचलने का नाम ज़िंदगी
अनुभव का इस्तेमाल मैं नहीं करुँगा तो कौन करेगा? ठहरा हुआ नहीं दिखना चाहता.
 
 
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