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गुरुवार, 23 अगस्त, 2007 को 13:52 GMT तक के समाचार
 
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कैरीबियाई और भोजपुरी का संगम
 

 
 
रेमो फ़र्नांडीज़
रेमो फ़र्नांडीज़ ने पहले भी कई अलग-अलग प्रयोग किए हैं
जाने माने गायक और संगीतकार रेमो फर्नांडीज़ ने पिछले दिनों एक लंबी यात्रा तय की-सात समंदर पार. पर असल में उन्होंने इस दौरान कई सदियाँ पार कर लीं.

ये यात्रा भारत से कैरीबियाई देश त्रिनिदाद और टोबेगो तथा जमैका की थी. मक़सद था भोजपुरी और अफ्रीकी संगीत को मिला कर कुछ नया निर्माण करने का.

कुल मिला कर उन्होंने दस संगीत रचनाएं तैयार की. इन पर मुम्बई की फिल्मकार सुरभि शर्मा ने एक फिल्म तैयार की 'जहाज़ी म्यूज़िक'.

जहाज़ी उन हज़ारों भारतीयों को कहा जाता है जो पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार से डेढ़ सौ साल पहले जहाज़ में बैठ कर गन्ने की खेती करने कैरीबियाई देशों में गये थे. आज उनके बच्चे इन देशों पर राज कर रहे हैं.

पूर्वजों को श्रद्धांजलि

रेमो का कहना है कि वे इसी प्रकार की संस्कृति वाले गोवा में पले बढ़े हैं. 'गोवा पर पुर्तगालियों का राज रहा है. वे भी समंदर पार कर के भारत आये थे. इस तरह मैने अपने पूर्वजों की यात्रा को श्रद्धांजलि दी है'.

 अक्सर मैं जहाँ फिल्म बनाती हूँ वहां लंबे अर्से तक रहती हूँ. उसमें डूब जाती हूँ. पर यहाँ मुझे पहले दिन से ही शूटिंग करनी पडी. इसने मेरे काम करने के तरीक़े को बदल दिया. मुझे अपनी फिल्म की भाषा और उसकी बनावट बदलनी पड़ी
 
सुरभि शर्मा

सुरभि ने बताया, "ये फिल्म एक यत्रा की शक्ल में तैयार की गयी है. हम रेमो को लेकर त्रिनिदाद और जमैका में अनेक स्थानों पर गए और रेमो ने वहां के संगीतकारों और गायकों को साथ लेकर एक नया संगीत तैयार किया. हम वहां पांच हफ्तों तक रहे. उस दौरान के कई लम्हे अब भी याद आते हैं. मोर्टीमो प्लानो के साथ ट्रैंच शहर में उसके चाहने वालों से घिर जाना एक अदभुत दृश्य था".

रेमो को अफ़सोस है कि वे ध्रुपती रामगुनाई के साथ मिल कर कोई धुन नहीं बना पाए. ध्रुपती वहां की मशहूर चटनी गायिका हैं. भोजपुरी और अफ्रीकन संगीत मिलाकर जो मसाला तैयार होता है उसे चटनी संगीत कहा जाता है. ये पूरे कैरीबियाई देशों में बेहद मशहूर है.

सुरभि का कहना है कि इस फिल्म ने उनके सोचने का तरीका बदल दिया है.

कैरीबियाई
फ़िल्म में कैरीबियाई कलाकार भी शामिल हैं

वह कहती हैं, "एक ऐसी जगह फिल्म बनाना जहाँ की संस्कृति हमारे तौर तरीके से बिल्कुल अलग हो एक चुनौती थी. अक्सर मैं जहाँ फिल्म बनाती हूँ वहां लंबे अर्से तक रहती हूँ. उसमें डूब जाती हूँ. पर यहाँ मुझे पहले दिन से ही शूटिंग करनी पडी. इसने मेरे काम करने के तरीक़े को बदल दिया. मुझे अपनी फिल्म की भाषा और उसकी बनावट बदलनी पड़ी".

इस फिल्म को बनाने के लिये डा.निरंजना ने वित्तीय सहायता दी. ये राशि उन्हें प्रिंस क्लौज़ फन्ड ने कैरीबियाई देशों पर काम करने के लिये दिया था.

ये फिल्म अभी केवल दिल्ली में दिखाई गई. फिल्म देखने के बाद कैरीबियाई मामलों के जानकार डा.बिन्देश्वर राम ने कहा कि फिल्म देखना उन देशों की यात्रा करने के समान था.

सुरभि जल्द् ही इस फिल्म को मुम्बई,गोवा और त्रिनिदाद तथा जमैका में भी दिखाएँगी.

 
 
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