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शनिवार, 18 अक्तूबर, 2003 को 12:14 GMT तक के समाचार
 
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महेश भट्ट पाकिस्तान जाकर फ़िल्म बनाएँगे
 

 
महेश भट्ट
महेश भट्ट को उम्मीद है कि फ़िल्म बनाने की अनुमति मिल जाएगी

बॉलीवुड के सुपरिचित निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट पाकिस्तान जाकर एक फ़िल्म बनाने की योजना बना रहे हैं.

विभाजन की पृष्ठभूमि पर बनने वाली इस फ़िल्म का नाम होगा 'पार्टीशन' और इसकी पूरी शूटिंग पाकिस्तान में ही होगी.

अनुमति के लिए वे जल्दी ही पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और प्रधानमंत्री ज़फ़रुल्ला जमाली से मिलने वाले हैं.

बीबीसी हिंदी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि वे एक ऐसी फ़िल्म बनाना चाहते हैं जो सही मायनों में दक्षिण एशियाई फ़िल्म हो.

उनकी योजना है कि इस फ़िल्म में न सिर्फ़ भारत और पाकिस्तान के कलाकार हों बल्कि नेपाल और बांग्लादेश से भी कलाकारों को इसमें लिया जाए.

यह पूछने पर कि इसकी शूटिंग पाकिस्तान में करने की कैसे सूझी, उन्होंने कहा कि यह विभाजन के समय की फ़िल्म है और कहानी के मुताबिक़ यह एहसास पैदा करना ज़रुरी है कि किसी देश से भागकर दूसरे देश की सीमा तक पहुँचने से पहले किस तरह का ख़ौफ़ होता है.

वे मानते हैं कि पाकिस्तान में शूटिंग किए बग़ैर यह माहौल पैदा नहीं किया जा सकेगा.

 

 हम राजनीति की दुनिया में कोई प्रभाव पैदा नहीं कर सकते अलबत्ता हम एक माहौल ज़रूर बना सकते हैं

महेश भट्ट

 

क्या इस तरह की फ़िल्म से दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने में मदद मिलेगी, इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ''हमें यह ग़लतफ़हमी हरगिज़ नहीं है कि हम मनोरंजन की दुनिया के लोग ऐसा कुछ कर सकते हैं."

उन्होंने कहा, ''हम राजनीति की दुनिया में कोई प्रभाव पैदा नहीं कर सकते अलबत्ता हम एक माहौल ज़रूर बना सकते हैं.''

उन्होंने कहा, ''हम प्यार-मोहब्बत की एक छोटी सी शुरुआत कर सकते हैं.''

कहानी

महेश भट्ट के मुताबिक़ फ़िल्म एक प्रेम कहानी पर आधारित होगी जिसमें एक मुसलमान नवयुवक की कहानी है जो एक हिंदू लड़की और उसके परिवार वालों को बचाने के लिए अपने ही भाइयों से लड़ता है.

आख़िर में उसे अपनी जान गवाँनी पड़ती है.

वे बताते हैं कि यह कहानी दरअसल एक थानेदार की सच्ची कहानी पर आधारित है जिसने विभाजन के दौरान दो सौ लोगों की जान बचाई थी.

महेश भट्ट बताते हैं कि उस थानेदार का कहना था कि वह अपने कर्तव्यों और धर्म का पालन करते हुए उसे लोगों का जान बचाना ज़रुरी लगा.

यह कहानी स्टीवन स्पीलबर्ग की फ़िल्म 'शिंडलर्स लिस्ट' की याद दिलाती है जिसमें एक जर्मन व्यापारी सैकड़ों यहूदियों की जान बचाता है.

 
 
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