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बुधवार, 08 अक्तूबर, 2003 को 12:40 GMT तक के समाचार
 
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मेरी फ़िल्म का रविशंकर से संबंध नहीं: देवआनंद
 
देवानंद
देवानंद अपनी फ़िल्म 'सौंग ऑफ़ लाइफ़' बनाने के सिलसिले में अमरीका में हैं

हिंदी फ़िल्म उद्योग के मशहूर फ़िल्म निर्माता, निर्देशक और अभिनेता देवानंद ने स्पष्ट किया है कि उनकी आने वाली फ़िल्म 'सौंग ऑफ़ लाइफ़' का विश्व प्रसिद्ध संगीतकार और सितार-वादक रवि शंकर से कोई संबंध नहीं है.

देवानंद आजकल अमरीका में हैं जहाँ वे अपनी नई फ़िल्म की कहानी और पात्रों के बारे में अंतिम निर्णय ले रहे हैं.

समाचार माध्यमों में ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि सितार-वादक रवि शंकर और उनकी बेटी नोरा जोंस इस बात से नाराज़ हैं कि बाप-बेटी के रिश्तों पर उनकी अनुमति के बिना ही फ़िल्म बनाई जा रही है.

उन्होंने यहाँ तक कहा कि उन्होंने किसी को भी ऐसा करने की अनुमति नहीं दी है और ये उनका व्यक्तिगत मामला है.

नोरा जोंस अपनी गायकी और संगीत के लिए सात ग्रैमी पुरस्कार जीत चुकी हैं.

जब अमरीका में देवानंद से इस विवाद के बारे में पूछा गया तो बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में उन्होंने इस बात से साफ़ इनकार किया कि उनकी फ़िल्म की कहानी रवि शंकर की कहानी से मिलती-जुलती है.

 

 यदि मैं रवि शंकर की जिंदगी से संबंधित फ़िल्म बनाऊँगा तो ज़ाहिर है कि उनके पास जाकर उनसे बात तो करुँगा. मैं उनसे नहीं मिला हूँ

देवानंद

 

उनका कहना था, "मेरी फ़िल्म की कहानी का रवि शंकर से कोई संबंध नहीं है."

उन्होंने कहा कि प्रेरणा किसी भी बड़े आदमी से मिल सकती है.

देवानंद ने कहा, "यदि मैं रवि शंकर की जिंदगी से संबंधित फ़िल्म बनाऊँगा तो ज़ाहिर है कि उनके पास जाकर उनसे बात तो करुँगा. मैं उनसे नहीं मिला हूँ."

जब उनसे पूछा गया कि क्या वे अपनी प्रस्तावित फ़िल्म में एक 80 वर्षीय संगीतकार की भूमिका निभा रहे हैं, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया.

उन्होंने कहा कि दो घंटे की ये फ़िल्म अंग्रेज़ी में होगी, हिंदी में नहीं और इसमें केवल दो या तीन भारतीय अभिनेता होंगे और अन्य सब अभिनेता अमरीकी होंगे.

उनका कहना था कि फ़िल्म के अभिनेताओं और शूटिंग के बारे में अगले बीस दिन में अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा और फिर वे मुंबई आकर 'प्रेस' की सारी शंकाओं का समाधान करेंगे.

उन्होंने कहा कि अली अक़बर ख़ान भी बड़े संगीतकार हैं और एसडी बर्मन भी बड़े संगीतकार थे जिनके साथ उन्होंने कई साल काम भी किया. उनका कहना था कि इस तरह संगीतकार तो पूरे विश्व में हैं.

देवानंद ने कहा कि यदि वे किसी संगीतकार की ज़िंदगी पर फ़िल्म बनाते हैं तो ये मतलब नहीं कि किसी एक संगीतकार की पूरी जिंदगी की कहानी को फ़िल्म में कैद कर दिया.

 
 
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