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नीना गुप्ता को सोशल मीडिया पर क्यों काम मांगना पड़ा?
- Author, सुप्रिया सोगले
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
90 के दशक के लोकप्रिय धारावाहिक 'सांस' और 'बुनियाद' की दमदार महिला नीना गुप्ता ने हाल ही में इंस्टाग्राम में अपनी एक फोटो डालकर अभिनय इंडस्ट्री में काम माँगा.
62 वर्षीय नीना गुप्ता का 30 साल का लम्बा एक्टिंग करियर रहा है. इन सालों में वो कई नामचीन फ़िल्में, धारावाहिक और नाटकों का हिस्सा रही हैं जिसमें शामिल हैं 'गाँधी', 'मंडी', 'यलगार', 'खलनायक', 'जस्सी जैसी कोई नहीं', 'गुमराह', 'मेरा वो मतलब नहीं था'.
बीबीसी से ख़ास रूबरू हुई नीना गुप्ता ने अपनी इस पोस्ट की वज़ह ज़ाहिर करते हुए बताया कि 2008 में उनकी शादी के बाद लोगों को लगा कि वो मुंबई छोड़ चुकी हैं और चुनिंदा भूमिकाएं ही कर रही हैं.
फ़ैशन डिज़ाइनर बेटी मसाबा के करियर में मशरूफ़ नीना गुप्ता तब टीवी धारावाहिक करना चाहती थीं, लेकिन समय की कमी के कारण नहीं कर पाई और इस कारण उन्हें काम मिलना कम होता चला गया.
उम्र के इस पड़ाव में अभिनेत्रियों के किरदार पर टिपण्णी करते हुए नीना गुप्ता कहती हैं, "मुझे दादी- नानी का किरदार नहीं करना है. हमारी जैसी अभिनेत्रियों के लिए किरदार कम है और अभिनेत्रियां ज़्यादा है. 30 की उम्र वाली अभिनेत्रियों को माँ का किरदार दिया जा रहा है जबकि मेरे उम्र के अभिनेता आज भी हीरो का किरदार निभा रहे हैं. ये दुःखद बात है पर हमारा समाज ही ऐसा है. इस बदलाव के लिए काफ़ी वक़्त लगेगा."
अब काम की कमी
नीना गुप्ता ने अपने करियर में कई विभिन्न किरदार निभाए हैं. पर उनका मानना है कि उनकी ये मज़बूती उनकी कमी बनती जा रही है और उनके काम में अब आड़े आ रही है. लोगों के ज़हन में उनके एक ही तरह के किरदार की छाप नहीं है और इसी कारण कास्टिंग के दौरान उनका नाम ज़हन में नहीं आता.
नीना गुप्ता को गर्व है कि वो अपने आप को इस उम्र में फिर से बतौर अभिनेत्री लांच कर रही हैं. हालाँकि पोस्ट डालने से पहले वो थोड़ी घबराई हुई थी कि उनका मज़ाक ना बन जाए पर लोगों का प्रोत्साहन और बेटी मसाबा के लेख ने उन्हें नया विश्वास दिया है और अब वो अच्छे किरदार करना चाहती हैं.
नीना गुप्ता जब फ़िल्म इंडस्ट्री में आई थी तब अमिताभ बच्चन की तरह बनने का ख़्वाब लेकर आई थी पर नीना उस ख़्वाब के आस पास भी पहुँच नहीं पाई.
वो कहती हैं, "मैं अभिताभ बच्चन जैसी बनना चाहती थी. वो सिर्फ स्टार नहीं, बल्कि वो महान अभिनेता भी हैं. मैं भी वही बनना चाहती थी. मुझे लगता था खूबसूरत होना ज़रूरी नहीं है मैं अभिनय अच्छा करती थी तो लोग पीछे आएंगे. पर ऐसा नहीं हुआ."
आईपीएस बनना चाहती थी
अपने अभिनय के संघर्ष पर विचार करते हुए नीना गुप्ता कभी-कभी सोचती है की उन्होंने गलत प्रोफ़ेशन तो नहीं चुन लिया. उनकी माँ उन्हें आईपीएस अफसर बनते देखना चाहती थी क्योंकि वो पढ़ाई में काफ़ी अच्छी थी.
अपने जीवन से सीख लेते हुए नीना गुप्ता देश के हर उम्र की तमाम महिलाओं को नसीहत देती हैं कि किसी के लिए भी अपने काम की क़ुरबानी नहीं देनी चाहिए. जब तक शरीर इज़ाजत देता है काम करते रहना चाहिए.
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